लखनऊ: आरक्षण बचाओ, आरक्षण बढ़ाओ को लेकर बहुजन आंदोलन महासभा ने उठाईं छह सूत्रीय मांगें

लखनऊ (Lucknow) में बहुजन आंदोलन महासभा (Bahujan Andolan Mahasabha) के तत्वावधान में मंगलवार को प्रेस क्लब लखनऊ (Press Club Lucknow) में ‘आरक्षण बचाओ, आरक्षण बढ़ाओ’ अभियान के तहत प्रेस वार्ता आयोजित की गई। महासभा के पदाधिकारियों ने आरक्षण व्यवस्था की सुरक्षा, सामाजिक न्याय और रोजगार से जुड़े छह सूत्रीय मांग-पत्र को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से इन मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई की मांग की।

आरक्षण को सामाजिक न्याय से जोड़ा:

प्रेस वार्ता में महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम पटेल (Shyam Patel) ने कहा कि आरक्षण सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक (Brajesh Pathak) द्वारा कथित रूप से आरक्षण विरोधी व्यक्तियों को दिए गए समर्थन का विरोध किया और उनके इस्तीफे की मांग रखी।

महासभा ने आरक्षण विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग भी उठाई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था की सुरक्षा और इससे जुड़े अधिकारों को लेकर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

जातीय जनगणना और आरक्षण की मांग:

बहुजन आंदोलन महासभा ने सरकार के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखीं। संगठन ने आरक्षण की सुरक्षा को लेकर सरकार से लिखित जवाबदेही और गारंटी देने की मांग की। इसके साथ ही देश में जातीय जनगणना कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

महासभा ने OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक वर्गों की वास्तविक जनसंख्या के आधार पर शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण लागू करने की मांग की। इसके अलावा सभी ए-ग्रेड सरकारी नौकरियों के साथ निजी कॉर्पोरेट कंपनियों और मीडिया संस्थानों में भी आरक्षण लागू किए जाने की मांग रखी गई।

भर्ती व्यवस्था में बदलाव की मांग:

प्रेस वार्ता में NFS (Not Found Suitable) और बैकलॉग भर्ती जैसी व्यवस्थाओं को समाप्त करने की मांग की गई। महासभा ने सभी रिक्त पदों को भरने और बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग सरकार के सामने रखी।

संगठन ने रिक्त सरकारी पदों पर शीघ्र भर्ती किए जाने की बात कही। इसके साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन और सरकारी नौकरियों में निजीकरण समाप्त कर स्थायी नियुक्तियां किए जाने की मांग भी उठाई गई।

न्यायाधीशों की चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल:

महासभा ने न्यायाधीशों की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग भी रखी। संगठन की ओर से आरक्षण लागू करने के लिए कॉलेजियम व्यवस्था में बदलाव किए जाने की मांग की गई।

पदाधिकारियों का कहना है कि सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़े विषयों पर व्यापक स्तर पर विचार किया जाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से संगठन ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को सरकार के सामने रखा है।

प्रेस वार्ता में पदाधिकारी रहे मौजूद:

प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अजय कश्यप (Ajay Kashyap), राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अविनास यादव (Dr. Avinash Yadav), राष्ट्रीय प्रवक्ता जितेन्द्र वर्मा (Jitendra Verma), राष्ट्रीय सचिव जितेन्द्र पटेल (Jitendra Patel), राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजित राम वर्मा (Rajit Ram Verma), राष्ट्रीय सचिव देवी लाल निषाद (Devi Lal Nishad), राष्ट्रीय सचिव आशीष सिंह रावत (Ashish Singh Rawat), राष्ट्रीय महामंत्री गंगा राम वर्मा (Ganga Ram Verma), राष्ट्रीय सचिव मो. यासीन परवाज (Mohd. Yasin Parwaz), प्रदेश सचिव राजन यादव (Rajan Yadav), राष्ट्रीय सचिव मो. बकरीदी खान (Mohd. Bakridi Khan), राष्ट्रीय सचिव दया शंकर वर्मा (Daya Shankar Verma), प्रदेश सचिव राम हेत यादव (Ram Het Yadav), प्रदेश मीडिया प्रभारी निर्देश पटेल (Nirdesh Patel), राष्ट्रीय सचिव बरखा कश्यप (Barkha Kashyap) तथा प्रदेश सचिव छोटे लाल यादव (Chhote Lal Yadav) मौजूद रहे।

लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का ऐलान:

महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा। संगठन ने सरकार से छह सूत्रीय मांगों पर प्रभावी कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा जताई।

प्रेस वार्ता के माध्यम से महासभा ने आरक्षण व्यवस्था की सुरक्षा, जातीय जनगणना, रोजगार, निजी क्षेत्र में आरक्षण, भर्ती व्यवस्था और न्यायाधीशों की चयन प्रक्रिया से जुड़े अपने विचार और मांगें सार्वजनिक रूप से रखीं।

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