डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम शुक्रवार शाम को 50 दिन की फरलो पर बरनावा के डेरा सच्चा सौदा आश्रम में पहुंच गया। उसके साथ परिवार के सदस्य व मुंह बोली बेटी हनीप्रीत भी आई है। इससे पहले भी वह पिछले वर्ष 21 दिन की फरलो पर आश्रम में रहा और यहां से 13 दिसंबर को सुनारिया जेल गया।

रोहतक की सुनारिया जेल में हत्या व दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा डेरा प्रमुख को छठी बार 50 दिन की फरलो मिली है। इससे पहले वह वर्ष 2022 में 17 जून को 30 दिन, 15 अक्तूबर को 40 दिन, वर्ष 2023 में 21 जनवरी को 40 दिन, 20 जुलाई को 30 दिन की पेरोल और 21 नवंबर को 21 दिन की फरलो पर आकर परिवार के सदस्य व मुंह बोली बेटी हनीप्रीत के साथ बरनावा के डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहा।
यहां से बीते वर्ष 13 दिसंबर को रोहतक की सुनारिया जेल गया। 50 दिनों की फरलो होने के बाद शुक्रवार देर शाम उसे सुनारिया जेल से हरियाणा पुलिस सुरक्षा में लेकर चली। जनपद में आने पर बागपत पुलिस ने उसे सुरक्षा दी। डेरे के मुख्य द्वार पर पुलिस फोर्स तैनात किया गया।
राम जी का पर्व दीपावली की तरह मनाने का दिया संदेश
डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम बरनावा के आश्रम में पहुंचते ही अपने यूट्यूब अकाउंट पर लाइव आये। डेरा प्रमुख ने साध संगत को राम जी के पर्व में शामिल होकर उसे दीपावली की तरह मनाने का संदेश दिया। साथ ही साध संगत से यूपी नहीं आने की अपील भी की।
ये होती है फरलो
दुष्कर्म व हत्या के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में उम्र कैद की सजा काट रहा डेरा प्रमुख को 50 दिन के लिए फरलो पर रिहा किया गया है। यह 50 दिन भी सजा में ही गिने जाएंगे। फरलो एक तरह से छुट्टी की तरह होती है, जिसमें कैदी को कुछ दिन के लिए रिहा किया जाता है।
फरलो की अवधि को कैदी की सजा में छूट और उसके अधिकार के तौर पर देखा जाता है। फरलो सिर्फ सजा मिल चुके कैदी को ही मिलती है। फरलो आमतौर पर उस कैदी को मिलती है, जिसे लंबे वक्त के लिए सजा मिली हो। इसका मकसद होता है कि कैदी अपने परिवार और समाज के लोगों से मिल सके, इसे बिना कारण के भी दिया जा सकता है। हर राज्य में फरलो को लेकर अलग-अलग नियम हैं।
