अयोध्या (Ayodhya)। राज्यसभा सांसद और पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा (Dr. Dinesh Sharma) ने कहा कि राम नाम का अमृत संपूर्ण जगत के कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि भगवान राम से भी बड़ा उनका नाम माना गया है और मानव जीवन में सद्कर्म करना तथा संतों के सानिध्य में रहना ही भारत की संस्कृति की मूल पहचान है। उन्होंने कहा कि संतों का मार्गदर्शन समाज को सही दिशा प्रदान करता है और भारतीय परंपरा में संतों का विशेष स्थान रहा है।

जन्मोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए डॉ. दिनेश शर्मा:
डॉ. दिनेश शर्मा ने यह विचार अयोध्या (Ayodhya) स्थित मणिराम छावनी (Maniram Chhawani) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए। यह आयोजन श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Trust) के अध्यक्ष एवं संत शिरोमणि महंत नृत्य गोपालदास जी महाराज के 88वें जन्मोत्सव के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या धाम ऐसा पवित्र स्थल है, जहां पहुंचकर श्रद्धालुओं को परम आनंद की अनुभूति होती है।
संतों के सानिध्य को बताया संस्कृति की पहचान:
डॉ. शर्मा ने कहा कि जहां संतों का निवास होता है, वहीं बसंत का वास होता है और वहीं दुखों का अंत भी संभव होता है। उन्होंने महंत नृत्य गोपालदास जी महाराज के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वे आगे भी समाज और धर्म से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में हुआ शुभारंभ:
मणिराम छावनी (Maniram Chhawani) में आयोजित 10 दिवसीय श्रीराम कथा कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर डॉ. दिनेश शर्मा ने संतों के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की तथा कथा व्यास स्वामी मिथिलेश नंदनी शरण जी महाराज के श्रीमुख से श्रीराम कथा का श्रवण किया। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से वे जन्मोत्सव समारोह के प्रथम दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित होते रहे हैं।
राम जन्मभूमि आंदोलन की स्मृतियों का किया उल्लेख:
अपने संबोधन में डॉ. शर्मा ने श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के समय मणिराम छावनी और महंत नृत्य गोपालदास जी महाराज के नेतृत्व में संतों और महंतों की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें अनेक अवसरों पर कारसेवकों के साथ मणिराम छावनी आने का अवसर मिला। उस समय बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होकर सामूहिक भोजन करते थे और जय श्री राम के उद्घोष से अयोध्या तथा आसपास का क्षेत्र गूंज उठता था।
उन्होंने कहा कि आज भव्य राम मंदिर का निर्माण विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा संचालित आंदोलन तथा उसमें संतों की सक्रिय सहभागिता के कारण संभव हो सका। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के सहयोग और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्णय के बाद यह मंदिर निर्माण संभव हुआ।
विपक्ष पर साधा निशाना:
डॉ. शर्मा ने अपने संबोधन में कुछ राजनीतिक दलों की आलोचना करते हुए कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर निर्माण को लेकर समय-समय पर नकारात्मक प्रचार किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को नकारात्मक प्रचार से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि गंगा माता, गौ माता और धरती माता का त्रिकोण भारत माता का स्वरूप है तथा सनातन धर्म ऐसा मार्ग प्रस्तुत करता है जिसमें सभी के सम्मान और संरक्षण की भावना निहित है।
कई संत और गणमान्य रहे उपस्थित:
कार्यक्रम में मंत्री सूर्य प्रताप शाही (Surya Pratap Shahi), महंत नृत्य गोपालदास जी महाराज के उत्तराधिकारी कमल नयन दास जी महाराज, रामानुजाचार्य विद्याभास्कर जी, राजकुमार दास जी, मैथिलीशरण दास जी महाराज, नेपाल (Nepal) से पधारे जगतगुरु कृष्णाचार्य जी महाराज, रामानंदाचार्य महाराज, व्यास मिथिलेश नंदनी शरण जी महाराज, तुलसीदास जी, महेंद्र दास जी महाराज, विमल दास जी महाराज सहित अनेक संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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