लोकसभा में लगातार दूसरे दिन राहुल गांधी की स्पीच को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने सदन में अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के नेता के रूप में बोलने की अनुमति न मिलने का आरोप लगाते हुए उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित होती रही और अंततः इसे स्थगित करना पड़ा।
लोकसभा में दूसरे दिन भी हंगामा:
मंगलवार को दोपहर करीब 2 बजे राहुल गांधी ने लोकसभा में बोलना शुरू किया। उन्होंने पूर्व आर्मी चीफ की एक अनपब्लिश्ड बुक के आर्टिकल का हवाला देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा उठाया। राहुल गांधी का कहना था कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे विपक्ष के नेता हैं और देश की सुरक्षा से जुड़े गंभीर विषय पर चर्चा करना चाहते हैं। जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, एनडीए के सांसदों ने बीच-बीच में टोकना शुरू कर दिया, जिससे सदन में शोरगुल बढ़ गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाने की कोशिश:
राहुल गांधी ने कहा कि वे केवल यह बताना चाहते हैं कि चाइना-इंडिया सीमा पर क्या हुआ और पूर्वी लद्दाख में किन परिस्थितियों में भारतीय सैनिक शहीद हुए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बार-बार रोका जा रहा है और बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही। राहुल गांधी करीब 14 मिनट तक अपनी बात रखने की कोशिश करते रहे, लेकिन लगातार व्यवधान के कारण वे अपना वक्तव्य पूरा नहीं कर सके।
कार्यवाही स्थगित होने की नौबत:
सदन में बढ़ते हंगामे के चलते आखिरकार लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इससे पहले भी सोमवार को राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान करीब 46 मिनट तक अपनी बात रखने की कोशिश की थी। उस दिन भी सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी थी, जिससे साफ है कि लगातार दो दिनों तक यह मुद्दा संसद के भीतर तनाव का कारण बना रहा।
सोमवार को भी रोके जाने का आरोप:
सोमवार की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी को कई बार टोकने का मामला सामने आया था। उस दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 11 बार, गृह मंत्री अमित शाह ने 7 बार, किरेन रिजिजू ने 2 बार और अनुराग ठाकुर ने 6 बार राहुल गांधी को रोका था। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर अपनी बात पूरी करने नहीं दी जा रही, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि नियमों के तहत ही कार्यवाही संचालित की जा रही है।
विपक्षी सांसदों का समर्थन:
राहुल गांधी के समर्थन में कुछ विपक्षी सांसदों ने भी कड़ा रुख अपनाया। सपा सांसद नरेश उत्तम पटेल, TMC सांसद शताब्दी रॉय और DMK सांसद डी एम कातिर आनंद ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से इनकार कर दिया। इन सांसदों का कहना था कि जब विपक्ष के नेता को ही अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल रहा, तो ऐसे में चर्चा में भाग लेने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
सदन के माहौल पर सवाल:
लगातार हो रहे हंगामे और कार्यवाही के स्थगन से संसद के कामकाज पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा से बचा जा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष नियमों और मर्यादा की बात कर रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने लोकसभा के भीतर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।
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