देवरिया: स्वास्थ्य व्यवस्था फेल, CHC रामपुर कारखाना में मरीजों के साथ खिलवाड़

रिपोर्टेर: गुड़िया मद्धेशिया

प्रदेश सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नज़र आ रही है। देवरिया (Deoria) जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर कारखाना (CHC Rampur Karkhana) की स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है। यहां इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को न तो बुनियादी सुविधाएं मिल पा रही हैं और न ही मानवीय व्यवहार, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Disorganized storage area featuring open cardboard boxes, a pile of yellow bags filled with miscellaneous items, and scattered cables on the floor.

मरीजों के इलाज की स्थिति बेहद चिंताजनक है। अस्पताल में पर्याप्त बेड की कमी के चलते कई मरीजों को अस्पताल परिसर में बनी सीमेंट की बेंच पर लिटाकर इंजेक्शन और प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। इलाज का यह तरीका न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि स्वास्थ्य मानकों के भी पूरी तरह खिलाफ है। यह दृश्य इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है।

बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव:
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर कारखाना में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में न तो पर्याप्त बेड उपलब्ध हैं और न ही मरीजों के लिए उचित इंतजाम। गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों को भी मजबूरी में बाहर बैठाकर इलाज किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को दर्शाता है।

जांच व्यवस्था ठप, मशीनें बनी शोपीस:
अस्पताल में जांच सुविधाओं की हालत भी बेहद खराब है। यहां लैब टेक्नीशियन (LT) की तैनाती तो है, लेकिन जांच मशीनें या तो बंद पड़ी हैं या उन्हें ढककर धूल में छोड़ दिया गया है। मशीनों पर जमी मोटी धूल साफ बताती है कि लंबे समय से इनका उपयोग नहीं हो रहा। इसके अलावा, लाखों रुपये की लागत से खरीदी गई कई अहम जांच मशीनें खराब पड़ी हैं, जिनकी मरम्मत या उपयोग को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।

सरकारी दवाओं की दुर्दशा:
दवाओं की स्थिति और भी चौंकाने वाली सामने आई है। अस्पताल परिसर में सरकारी दवाएं खुले में कचरे की तरह फेंकी हुई मिलीं। यह न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि मरीजों के अधिकारों का भी सीधा उल्लंघन है। सरकार द्वारा आम जनता को निशुल्क दवा और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा।

जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल:
इस पूरी स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं, या फिर यह लापरवाही किसी बड़े खेल की ओर इशारा कर रही है? अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर इतनी गंभीर खामियों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

आम जनता भुगत रही लापरवाही की कीमत:
देवरिया जिले के इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली यह साबित करती है कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब, जरूरतमंद और मजबूर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जिनके पास निजी अस्पतालों में इलाज कराने का विकल्प नहीं है। सरकारी अस्पताल ही उनका एकमात्र सहारा होते हैं, लेकिन यहां भी उन्हें निराशा हाथ लग रही है।

सुधार की दरकार:
स्वास्थ्य केंद्र रामपुर कारखाना की स्थिति तत्काल हस्तक्षेप और सुधार की मांग करती है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी बदतर हो सकते हैं। मरीजों को सम्मानजनक और सुरक्षित इलाज मिलना उनका अधिकार है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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