दिल्ली में दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन (Durgabai Deshmukh South Campus Metro Station) के पास बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों और दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई लिंचिंग के विरोध में जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। यह प्रदर्शन सर्व भारतीय हिंदी बंगाली संगठन (Sarv Bharatiya Hindi Bangali Sangathan), विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) और बजरंग दल (Bajrang Dal) से जुड़े सदस्यों द्वारा किया गया। प्रदर्शन का उद्देश्य बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करना रहा।
संगठनों ने जताया आक्रोश:
प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हो रहे हैं और वहां की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई लिंचिंग मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है, जिस पर चुप्पी साधना उचित नहीं है। उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर नारे लगाए और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की।
लिंचिंग की घटना को बताया अमानवीय:
प्रदर्शनकारियों ने दीपू चंद्र दास की हत्या को सुनियोजित हिंसा करार दिया। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाएं किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भीड़ द्वारा की गई हिंसा न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन भी है।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता:
संगठनों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनका कहना था कि वहां रहने वाले अल्पसंख्यक भय के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं। प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
शांतिपूर्ण रहा विरोध प्रदर्शन:
यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। प्रदर्शनकारियों ने अनुशासन बनाए रखते हुए अपनी बात रखी और किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं फैलने दी। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिससे कानून व्यवस्था बनी रही।
न्याय और कार्रवाई की मांग:
प्रदर्शन के अंत में संगठनों ने मांग की कि बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, तब तक आवाज उठाना जरूरी है।
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