रिपोर्टर: अमित कुमार
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है, जहां प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाली मासूम छात्राओं से पढ़ाई के बजाय झाड़ू लगवाई जा रही है। यह मामला शिक्षा क्षेत्र सोहाँव के अंतर्गत आने वाले पिपरा कला गांव स्थित नंबर दो प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चाओं में आ गया है। वायरल वीडियो में कक्षा 2 की छात्रा सीमा स्कूल परिसर में झाड़ू लगाते हुए दिखाई दे रही है, जिसने सरकारी स्कूलों में बच्चों से कराए जा रहे कार्यों पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
वीडियो के सामने आने के बाद न केवल अभिभावकों बल्कि आम लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाना है या उनसे सफाई जैसे कार्य कराना। इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है।
वायरल वीडियो ने खोली स्कूल की पोल:
वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाली कक्षा 2 की छात्रा सीमा से झाड़ू लगवाई जा रही है। छात्रा का कहना है कि स्कूल में गुरु जी द्वारा झाड़ू लगाने के लिए कहा जाता है। यही नहीं, उसी विद्यालय में पढ़ने वाली दो-तीन अन्य छात्राओं ने भी बताया कि इस स्कूल में यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि लंबे समय से बच्चों से झाड़ू लगवाने का काम कराया जाता रहा है। बच्चों के इन बयानों ने यह साफ कर दिया कि मामला किसी एक दिन का नहीं, बल्कि रोजमर्रा की व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है।
अभिभावकों में आक्रोश, बोले- पढ़ने भेजते हैं, सफाई के लिए नहीं:
वीडियो वायरल होने के बाद छात्रा सीमा के माता-पिता ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि वे अपनी बेटी को स्कूल इसलिए भेजते हैं ताकि वह पढ़-लिखकर आगे बढ़ सके, न कि झाड़ू लगाने के लिए। अभिभावकों का साफ कहना है कि अगर झाड़ू ही लगवानी होती तो वे बच्चों को घर पर ही रखकर यह काम करवा लेते। सरकारी स्कूलों से उन्हें शिक्षा की उम्मीद होती है, न कि बच्चों के बचपन से काम करवाने की।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले:
यह कोई पहली घटना नहीं है जब सरकारी विद्यालयों में बच्चों से झाड़ू लगवाने का वीडियो सामने आया हो। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से ऐसे कई वीडियो वायरल हो चुके हैं, जिनमें मासूम बच्चों से सफाई या अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जाते दिखे हैं। हर बार वीडियो वायरल होने के बाद विभागीय स्तर पर जांच और कार्रवाई की बात सामने आती है, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर वही हो जाते हैं। यही कारण है कि इस बार भी लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या इस मामले में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या यह सिर्फ एक और फाइल बनकर रह जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल:
सरकारी विद्यालयों का उद्देश्य समाज के हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। लेकिन जब विद्यालयों में बच्चों से पढ़ाई के बजाय झाड़ू लगवाई जाती है, तो यह उद्देश्य कहीं न कहीं कमजोर पड़ता नजर आता है। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया गया है, जिसमें उनके मानसिक और शारीरिक विकास का ध्यान रखना अनिवार्य है। ऐसे में बच्चों से सफाई जैसे कार्य कराना न केवल उनकी पढ़ाई को प्रभावित करता है, बल्कि उनके आत्मसम्मान पर भी असर डालता है।
अब सबकी नजर शिक्षा विभाग पर:
वीडियो वायरल होने के बाद अब सबकी नजर बलिया जिले के शिक्षा विभाग पर टिकी हुई है। यह देखना अहम होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या संबंधित विद्यालय के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा। अभिभावक और स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी, ताकि भविष्य में किसी भी मासूम बच्चे को पढ़ाई छोड़कर झाड़ू न उठानी पड़े।
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