गाजीपुर: भीषण गर्मी में चरमराई बिजली व्यवस्था, मैनपावर की कमी से बढ़ी उपभोक्ताओं की परेशानी

गाजीपुर (Ghazipur) जिले में भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच विद्युत व्यवस्था को लेकर लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिले के कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से उपभोक्ताओं को लंबे समय तक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि विद्युत विभाग में मैनपावर की कमी के कारण फॉल्ट ठीक करने में दो से तीन दिन तक का समय लग रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

मैनपावर की कमी बनी बड़ी चुनौती:

सूत्रों के अनुसार जिले में संविदा कर्मियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। विभागीय स्तर पर इस समस्या को दूर करने के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए जाने से हालात लगातार प्रभावित हो रहे हैं। हाल ही में ग्राम बौरी और फुल्ली में नए विद्युत उपकेंद्र शुरू किए गए हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए अलग से पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते पहले से कार्यरत संविदा कर्मियों को ही नए उपकेंद्रों पर तैनात कर दिया गया, जिससे उन पर कार्यभार और बढ़ गया है।

नगर से गांव तक प्रभावित विद्युत व्यवस्था:

जिले के नगर क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बिजली व्यवस्था दबाव में दिखाई दे रही है। फॉल्ट की स्थिति में मरम्मत कार्य समय पर नहीं हो पा रहा है। विशेष रूप से रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है, क्योंकि कई स्थानों पर नाइट गैंग की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रात में आने वाले फॉल्ट को दूर करने में काफी समय लग जाता है और उपभोक्ताओं को घंटों बिजली संकट झेलना पड़ता है।

संविदा कर्मियों की संख्या में आई कमी:

जानकारी के अनुसार पिछले माह कई दर्जन संविदा कर्मियों की छंटनी के बाद कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। पहले जिले में लगभग 1268 संविदा कर्मी कार्यरत थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर करीब 1104 रह गई है। कर्मचारियों की संख्या कम होने का सीधा असर विद्युत आपूर्ति व्यवस्था और शिकायतों के निस्तारण पर पड़ रहा है।

पीरनगर उपकेंद्र की स्थिति भी चिंताजनक:

जिले का महत्वपूर्ण विद्युत उपकेंद्र पीरनगर (Pirnagar) भी मैनपावर संकट से जूझ रहा है। इस उपकेंद्र से जिलाधिकारी, न्यायिक अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक सहित कई महत्वपूर्ण कार्यालयों और आवासों को बिजली आपूर्ति की जाती है। यहां कुल छह फीडर संचालित हैं, लेकिन कुशल लाइनमैन की संख्या केवल चार बताई जा रही है। वहीं आवश्यकता के अनुसार आठ अकुशल संविदा कर्मियों की जरूरत है, जबकि वर्तमान में केवल छह कर्मी ही उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति या आंधी-तूफान के दौरान बिजली व्यवस्था बहाल करने में अतिरिक्त समय लग जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल:

सूत्रों का कहना है कि पर्याप्त कुशल लाइनमैन उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार निजी लोगों की सहायता लेकर पोल पर चढ़कर कार्य कराया जाता है। इससे सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में दुल्लहपुर (Dullahpur) क्षेत्र के ददरा गांव में निजी कर्मी वीरेंद्र विश्वकर्मा (Virendra Vishwakarma) की हादसे में मौत होने की घटना भी चर्चा का विषय बनी रही। इसके अलावा विभिन्न उपकेंद्रों पर संविदा कर्मियों की मृत्यु या सेवा से हटने के बाद रिक्त पदों पर नई तैनाती नहीं हो सकी है।

सेवराई क्षेत्र में भी कर्मचारियों का अभाव:

जमानिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक ओमप्रकाश सिंह (Omprakash Singh) के गृह क्षेत्र अंतर्गत स्थित सेवराई (Sevrai) उपकेंद्र में भी कर्मचारियों की कमी बताई जा रही है। यहां तीन फीडरों के संचालन की जिम्मेदारी है, लेकिन कुशल लाइनमैन की संख्या केवल एक होने से फॉल्ट और बिजली कटौती की समस्या बढ़ रही है। इससे क्षेत्र के उपभोक्ताओं में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

उपभोक्ताओं ने जताई चिंता:

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ जाती है, ऐसे समय में कर्मचारियों की कमी व्यवस्था को और कमजोर बना रही है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में बिजली संकट और गहरा सकता है। वहीं विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और लोग व्यवस्था में सुधार की अपेक्षा कर रहे हैं।

Disclaimer:

यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com

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रिपोर्ट : सऊद अंसारी
ब्यूरो: हसीन अंसारी

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