Video: डॉ दिनेश शर्मा ने जनसंख्या असंतुलन पर चिंता जताई

नई दिल्ली/लखनऊ। देश में जनसंख्या संरचना में बदलाव के कारण सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से गंभीर संकेत सामने आ रहे हैं। डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि किसी राष्ट्र की स्थिरता संतुलित जनसांख्यिकीय संरचना पर आधारित होती है। उनके अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों और कुछ राज्यों में असंतुलित जनसंख्या वृद्धि चिंता का विषय है और इस दिशा में सरकार को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

संसद में विशेष उल्लेख:
डॉ दिनेश शर्मा ने राज्यसभा में विशेष उल्लेख के ज़रिए असंतुलित जनसंख्या वृद्धि के मुद्दे को उठाया। उन्होंने बताया कि भारत में जनसंख्या संतुलन विभिन्न स्तरों पर प्रभावित हो रहा है। इसके चलते सामाजिक संरचना में बदलाव आ रहा है और कुछ समुदायों में प्रजनन दर में कमी और वृद्धि के कारण असंतुलन बढ़ रहा है।

जनसंख्या में बदलाव के आंकड़े:
डॉ शर्मा के अनुसार पिछले 65 साल में हिंदू आबादी में 8 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। देश के 7 राज्यों और सीमावर्ती 100 से अधिक जिलों में हिंदू अब अल्पसंख्यक हो गए हैं। हिंदू समाज की प्रजनन दर वर्तमान में 1.9 प्रतिशत से कम हो गई है, जो जनसंख्या स्थिरीकरण के मानक 2.1 प्रतिशत से भी कम है। प्रजनन दर में कमी के कारण वृद्धजन के अनुपात में बढ़ोतरी होने की संभावना एक नई चुनौती बन सकती है।

समावेशी नीति की आवश्यकता:
सांसद ने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे पर सरकार को समान और समावेशी नीति लानी चाहिए, जो सभी वर्गों पर लागू हो। उन्होंने अवैध घुसपैठ और जबरन अथवा प्रलोभन से किए जा रहे धर्मांतरण पर भी कठोर नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही समाज में संतुलित परिवार व्यवस्था और जनसंख्या नियंत्रण के प्रति लोगों को जागरूक करने की बात कही।

संसाधनों और योजनाओं का पुनर्वितरण:
डॉ शर्मा ने कहा कि जिन क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना में तेज बदलाव आया है, वहां संसाधनों और योजनाओं का वैज्ञानिक और न्यायसंगत पुनर्वितरण किया जाना चाहिए। इससे न केवल सामाजिक संतुलन बना रहेगा बल्कि राष्ट्रीय एकता भी मजबूत होगी। उनका मानना है कि इस दिशा में ठोस और दीर्घकालिक उपाय ही राष्ट्र की स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं।

समाज और सुरक्षा पर प्रभाव:
डॉ दिनेश शर्मा के अनुसार, असंतुलित जनसंख्या वृद्धि से न केवल सामाजिक संरचना प्रभावित होती है, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ता है। संतुलित जनसंख्या और सामाजिक समरसता बनाए रखना इसलिए आवश्यक है ताकि राष्ट्र के भीतर एकता और स्थिरता बनी रहे।

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