प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गुरुवार को केंद्रीय सचिवों के साथ बैठक की। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से जारी बयान के मुताबिक, बैठक में प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से विश्वविद्यालयों और युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं और विश्वविद्यालयों से जुड़कर नीतियां तैयार करने के दौरान नए और अलग विचारों को शामिल किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने सचिवों से कहा कि वे मौजूदा समस्याओं और उपलब्ध आंकड़ों पर ध्यान देने के साथ-साथ देश के भविष्य को लेकर भी व्यापक सोच रखें। बैठक में बुनियादी ढांचे, संपर्क व्यवस्था, सुरक्षा और विदेश मामलों से जुड़े मंत्रालयों के कामकाज समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
शिक्षा और युवाओं से संवाद बढ़ाने पर जोर:
बैठक में प्रधानमंत्री ने सरकार, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच अधिक संवाद की जरूरत बताई। उनका कहना था कि युवाओं से सीधे जुड़ने और विश्वविद्यालयों के साथ विचार-विमर्श बढ़ाने से नीति निर्माण में नए विचारों को शामिल करने में मदद मिल सकती है।
पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के बाद सरकार की ओर से युवाओं से जुड़े विषयों पर ध्यान बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इंस्टाग्राम (Instagram) पर रील्स के माध्यम से भी छात्रों से संवाद किया है। इसके अलावा वह मंत्रियों से भी सामाजिक माध्यमों पर सक्रिय रहने की बात कह चुके हैं।
बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था पर चर्चा:
प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल के साथ भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था को विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में इस क्षेत्र से जुड़े कार्यों को लेकर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को मौजूदा जरूरतों के साथ आने वाले समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं पर काम करने की बात कही। उनका जोर विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय बेहतर बनाने पर भी रहा।
सुरक्षा और विदेश मामलों पर आगे की रणनीति:
बैठक में सुरक्षा और विदेश मामलों से जुड़े मंत्रालयों की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। इन दोनों क्षेत्रों से जुड़े विषयों को लेकर आगे की दिशा और प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से वर्तमान परिस्थितियों और आंकड़ों का अध्ययन करने के साथ भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर काम करने को कहा। बैठक में सुरक्षा और विदेश मामलों से संबंधित मंत्रालयों के कार्यों की समीक्षा भी चर्चा का हिस्सा रही।
डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर जोर:
प्रधानमंत्री ने डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बेहतर इस्तेमाल की जरूरत बताई। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में मानवीय निगरानी और मानवीय निर्णय को जरूरी बताया।
बैठक में तकनीक के उपयोग के साथ इस बात पर भी जोर दिया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कार्यों में मानवीय निगरानी बनी रहे। प्रधानमंत्री ने डेटा के प्रभावी इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण बताया।
अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की बात:
सभी क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में विभिन्न क्षेत्रों में नए विचारों और नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा पर चर्चा हुई।
समुद्री क्षेत्र और जहाज निर्माण पर फोकस:
प्रधानमंत्री ने समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करने की जरूरत बताई। इसके साथ ही जहाज निर्माण क्षेत्र से जुड़े लक्ष्यों की भी समीक्षा पर जोर दिया गया।
जहाज निर्माण को बुनियादी ढांचे का दर्जा मिलने के बाद यह देखने की जरूरत बताई गई कि इससे निर्धारित लक्ष्य पूरे हो रहे हैं या नहीं। बैठक में इस क्षेत्र की प्रगति और आगे की दिशा पर विचार किया गया।
बंदरगाहों के साथ विकास पर जोर:
प्रधानमंत्री ने केवल बंदरगाहों के निर्माण तक सीमित रहने के बजाय बंदरगाह आधारित विकास पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। उन्होंने व्यापक विकास रणनीति के तहत बंदरगाहों की भूमिका को देखने पर जोर दिया।
बैठक में समुद्री क्षेत्र, बंदरगाह और उससे जुड़े विकास कार्यों को लेकर व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
विनिर्माण और निर्यात इकाइयों को बेहतर संपर्क:
बैठक में विनिर्माण इकाइयों और निर्यात इकाइयों को बेहतर संपर्क व्यवस्था उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की बात कही गई।
प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में चर्चा किए गए मुद्दों में बुनियादी ढांचा, सुरक्षा, तकनीक, अनुसंधान, समुद्री क्षेत्र, जहाज निर्माण, बंदरगाह, विनिर्माण और निर्यात प्रमुख रहे।
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