जापान में पीयूष गोयल का सख्त अंदाज: चीन पर तंज से लेकर जापानी उद्योग को आईना; निवेश का न्योता, साझेदारी पर दम

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) जापान में निवेश आकर्षित करने पहुंचे हैं। टोक्यो में हुई अलग-अलग बैठकों में उन्होंने जापानी उद्योग जगत को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया, लेकिन इस दौरान उनका रुख केवल निवेश मांगने वाला नहीं रहा। उन्होंने उद्योग जगत की ओर से उठाई गई शिकायतों और मांगों पर सीधे सवाल किए और कई मामलों में समाधान का रास्ता भी बताया। गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत निवेश के लिए अपने दरवाजे खोल रहा है, लेकिन देश के हितों और अपनी शर्तों से समझौता किए बिना।

जापानी उद्योग जगत को गोयल का दो टूक संदेश:

बैठकों में पीयूष गोयल ने कहा कि उद्योग के कुछ हिस्सों की मांगों को पूरा करना काफी मुश्किल होता है। उन्होंने साफ किया कि ऐसी मांगों को स्वीकार न करने के लिए वह माफी नहीं मांगेंगे। गोयल ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह अपनी बात खुलकर और साफ तरीके से रखते हैं।

उनके संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि भारत निवेश के लिए तैयार है, लेकिन निवेश आकर्षित करने के नाम पर ऐसे फैसले नहीं किए जाएंगे, जिनसे देश के हित प्रभावित हों। उन्होंने उद्योग जगत की जायज समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया, लेकिन अनुचित मांगों को लेकर सरकार के रुख को भी स्पष्ट रखा।

डाटा केंद्रों के लिए भारत को बताया भरोसेमंद ठिकाना:

टोक्यो में एक बैठक के दौरान गोयल ने भारत को डाटा केंद्रों के लिए भरोसेमंद स्थान बताते हुए बौद्धिक संपदा और आंकड़ों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत में कंपनियों के आंकड़े चोरी होने का खतरा नहीं होगा और बौद्धिक संपदा से समझौता नहीं किया जाएगा।

गोयल ने कहा कि भारत में बौद्धिक संपदा का सम्मान किया जाता है और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित किया जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने बिना किसी देश या व्यक्ति का नाम लिए एक तंज भी किया। उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियों को भारत में कारोबार के दौरान इस तरह की चिंता नहीं करनी होगी कि कोई व्यक्ति भारत में पैसा कमाकर या सफल कारोबारी बनकर अचानक गायब हो जाए और बाद में किसी जापानी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में दिखाई दे।

गोयल की इस टिप्पणी को चीन के संदर्भ में देखे जाने की बात सामने आई, हालांकि उन्होंने किसी देश या व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया।

भारत किसी का विकल्प नहीं, अपनी पहचान वाला साझेदार:

गोयल ने जापानी कंपनियों की उस रणनीति पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें पहले चीन और उसके बाद दक्षिण-पूर्व एशिया में कारोबार का विस्तार किया गया। उन्होंने भारत को किसी अन्य देश के विकल्प के रूप में पेश किए जाने की धारणा को खारिज किया।

उन्होंने कहा कि भारत किसी का विकल्प नहीं है और न ही उसे किसी की जगह भरने वाले देश के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत अपनी क्षमताओं और खूबियों के आधार पर एक भरोसेमंद साझेदार है।

गोयल ने यह भी कहा कि भारत किसी दूसरे देश की तकनीक नहीं चुराता और न ही बौद्धिक संपदा की नकल करके उत्पाद तैयार कर बाजार में उतारता है। उन्होंने भारत में निवेश के लिए भरोसे और तकनीकी सुरक्षा को महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा।

शिकायत सुनी और उसी बैठक में समाधान तलाशा:

पीयूष गोयल का रुख केवल सख्त संदेश तक सीमित नहीं रहा। कारोबार सुगमता को लेकर जापानी उद्योग जगत की ओर से उठाई गई समस्याओं पर उन्होंने तत्काल कार्रवाई का उदाहरण भी दिया।

गोयल ने बताया कि उसी सुबह उनकी दो बड़ी कंपनियों के साथ बैठक हुई थी। इनमें से एक कंपनी भारत में अर्धचालक उपकरण का निर्माण करना चाहती है, जबकि दूसरी वाहन कलपुर्जों के क्षेत्र में काम करती है। दोनों कंपनियों ने अपनी-अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं।

गोयल के अनुसार, दोनों मामलों में बैठक के दौरान ही दो फोन कॉल किए गए और संबंधित अड़चनों के समाधान की दिशा में कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि कंपनियों को भरोसा दिया गया है कि अगले दो महीनों में भारत अपने नियमों में संशोधन करेगा और नए नियम भी लाए जाएंगे, ताकि भारत में उत्पादन शुरू करने के दौरान उन्हें परेशानी न हो।

जायज मांगों पर तुरंत फैसला, अनुचित मांगों पर नहीं:

गोयल ने कहा कि सरकार चलते-चलते फैसले लेने में विश्वास रखती है। जहां कोई मांग जायज और उचित होगी, वहां समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार का प्रयास है कि निवेश और उत्पादन से जुड़ी उचित समस्याओं को समय पर दूर किया जाए।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मांग का उद्देश्य केवल दूसरे देश से बेहद कम या अनुचित कीमत पर माल को भारत में आने की अनुमति दिलाना है, तो ऐसी मांग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। गोयल ने कहा कि इस तरह की स्थिति में सरकार माफी नहीं मांगेगी।

टोक्यो में हुई बैठकों के दौरान गोयल ने एक तरफ जापानी उद्योग जगत को भारत में निवेश का अवसर बताया, वहीं दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट किया कि निवेश और कारोबार को बढ़ावा देने के साथ भारत अपने हितों, नियमों और उचित प्रतिस्पर्धा से समझौता नहीं करेगा।

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