10 मई को सुबह करीब साढ़े 5 बजे पाकिस्तान की ओर से बमबारी शुरू हुई। जम्मू और आसपास के इलाके धमाकों से दहल उठे। आसमान में ड्रोन उड़ रहे थे। जम्मू से करीब 15 किमी और LOC से करीब 50 किमी दूर, पहाड़ी पर खेड़ी गांव में भी धमाकों की गूंज सुनाई देने लगी। 47 साल के जाकिर हुसैन की धमाकों की आवाज से ही नींद खुली। वे घबराए और परिवार के साथ एक कमरे में छिप गए। तभी घर के पास जोरदार धमाका हुआ। घर की खिड़कियों के कांच टूट गए। जाकिर को लगा कि अब घर में रुकना सेफ नहीं है। उन्होंने पत्नी और बच्चों के साथ पास में एक अंडर कंस्ट्रक्शन सुरंग में जाने का फैसला किया। जाकिर का घर एक पहाड़ी पर था। उन्हें जंगल पार करके सुरंग तक पहुंचना था। वे परिवार के साथ घर से निकले ही थे कि सड़क पर एक बम आकर सीधे उनके पैर के पास गिरा। जाकिर का दायां पैर एक झटके में उखड़कर शरीर से अलग हो गया। पूरे बदन पर स्प्लिंटर से घाव हो गए। मौके पर ही जाकिर की मौत हो गई। परिवार ने पूरी दास्ताँ बताई, इस क्षेत्र में आज़ादी के बाद कभी कोई हमला नहीं हुआ था और न कोई बम गिरा था, LG मनोज सिन्हा ने… देखिये विडियो :

