Video:“मैं नहीं भूलूंगी” पहलगाम हमले में शहीद शुभम की पत्नी का छलका दर्द

पहलगाम आतंकी हमले की बरसी के मौके पर पीड़ित परिवारों का दर्द एक बार फिर सामने आया है। इस हमले में Kanpur के शुभम द्विवेदी की भी जान गई थी। बरसी के अवसर पर उनकी पत्नी ऐशान्या ने अपने जीवन के उस दर्दनाक अनुभव को साझा किया, जिसने उनके पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। उन्होंने बताया कि कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता और यह घटना उनके जीवन में ऐसा ही एक अध्याय बन गई है।

दर्द से ताकत तक का सफर:
ऐशान्या ने बताया कि इस हादसे के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। शुरुआत में वह इतनी टूट चुकी थीं कि खुद को संभालना भी मुश्किल हो गया था। उन्होंने कहा कि कई लोग ऐसे सदमे के बाद डिप्रेशन में चले जाते हैं, लेकिन उन्होंने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाने का निर्णय लिया। इसी कारण आज वह खुलकर अपनी बात रख पा रही हैं और अपने अनुभव को साझा कर रही हैं।

पहचान को लेकर पीड़ा:
आईएएनएस से बातचीत के दौरान ऐशान्या ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग उन्हें इस दर्दनाक घटना के कारण पहचानने लगे। उनका कहना था कि वह एक कलाकार पृष्ठभूमि से आती हैं और हमेशा चाहती थीं कि उनकी पहचान उनके काम और प्रतिभा के आधार पर हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह से पहचान मिलना उनके लिए कभी भी सुखद नहीं रहा।

लोगों का एक ही उद्देश्य:
उन्होंने बताया कि अब उनसे मिलने आने वाले लोग, चाहे वे नेता हों, व्यवसायी हों या आम नागरिक, सभी एक ही उद्देश्य से आते हैं। लोग शुभम द्विवेदी को श्रद्धांजलि देने और उनके परिवार का हाल जानने के लिए आते हैं। ऐशान्या के अनुसार, अब तक किसी ने भी इस दुखद घटना को किसी अन्य उद्देश्य से जोड़ने की कोशिश नहीं की है।

राजनीति से दूर रहा दुख:
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि किसी ने भी इस दुख को राजनीतिक रंग देने का प्रयास नहीं किया। सभी लोग केवल संवेदना प्रकट करने और परिवार का हाल जानने के लिए ही पहुंचे। इस बात ने उन्हें कुछ हद तक संतुलन बनाए रखने में मदद दी।

जिंदगी में अचानक आया बदलाव:
ऐशान्या ने अपनी निजी जिंदगी के बदलाव को याद करते हुए कहा कि शादी के कुछ ही महीनों बाद उनकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि यह बदलाव इतना गहरा था कि वह इसे अपने किसी भी परिचित या यहां तक कि अपने सबसे बड़े विरोधी के साथ भी नहीं देखना चाहेंगी।

अमिट यादें और जीवनभर का असर:
उन्होंने बताया कि इस तरह की घटनाएं इंसान के मन पर स्थायी छाप छोड़ देती हैं। अपने सामने जीवनसाथी को खोने का दर्द ऐसा होता है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और ऐसे दृश्य किसी के लिए भी जीवनभर भूल पाना संभव नहीं है।

दर्द बना हिम्मत का आधार:
ऐशान्या ने अंत में कहा कि अब यही दर्द उनके लिए हिम्मत का आधार बन गया है। उन्होंने बताया कि अगर वह आज अपनी बात कह पा रही हैं, तो उसका कारण यही है कि उन्होंने अपने दुख को अपनी ताकत में बदलने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि आगे के जीवन में यही ताकत उन्हें आगे बढ़ने में मदद करेगी।


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