भाजपा से लड़ते-लड़ते विपक्ष प्रभु श्रीराम से टकराने लगा, भूल गया कि राम से लड़ेंगे तो निपट जाएंगे : संदीप सिंह

कन्नौज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और वैचारिक दिशा को लेकर तीखे और स्पष्ट विचार सामने आए। मंच से दिए गए संबोधन में यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि राजनीतिक विरोध की सीमाएं जब आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों से टकराने लगें, तो उसका प्रभाव व्यापक और निर्णायक होता है। वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश के वर्तमान शासन मॉडल को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की नीतियों से जोड़ते हुए इसे एक वैचारिक निरंतरता के रूप में प्रस्तुत किया।

कन्नौज में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जयंती पर विचार साझा किए। मंच पर मंत्री संदीप सिंह अन्य नेताओं के साथ उपस्थिति में सम्मानित किए गए।

कार्यक्रम का आयोजन और पृष्ठभूमि:
यह कार्यक्रम कन्नौज के मुक्ताकाशीय मंच, रोमा स्मारक में आयोजित किया गया था। अवसर था पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जयंती का। इस मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने राज्य की राजनीति, विपक्ष की भूमिका और सुशासन की अवधारणा पर विस्तार से विचार रखे।

राजनीतिक संघर्ष से आस्था तक की बहस:
संदीप सिंह ने कहा कि भाजपा से लगातार राजनीतिक संघर्ष करते-करते विपक्ष अब प्रभु श्रीराम से ही टकराने की स्थिति में आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास और जनभावनाएं इस बात की साक्षी हैं कि जब भी आस्था के साथ टकराव हुआ, उसका परिणाम विरोध करने वालों के लिए अनुकूल नहीं रहा। उनके अनुसार विपक्ष यह भूल गया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े मुद्दे केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना से जुड़े होते हैं।

कल्याण सिंह के सिद्धांतों की निरंतरता:
अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में आज जो कानून का राज, पारदर्शिता और प्रशासनिक सख्ती दिखाई देती है, उसकी जड़ें कल्याण सिंह के शासनकाल में ही दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि बाबूजी का सुशासन मॉडल आज भी प्रासंगिक है और वर्तमान शासन उसी वैचारिक आधार को आगे बढ़ा रहा है। उनके अनुसार यह कोई नया प्रयोग नहीं, बल्कि पहले से स्थापित सिद्धांतों का विस्तार है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व का उल्लेख:
संदीप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश जिस निर्णायक और अनुशासित प्रशासन की ओर बढ़ रहा है, उसकी वैचारिक नींव पहले ही रखी जा चुकी थी। आज वही विचारधारा आधुनिक संदर्भों के अनुरूप और अधिक प्रभावी रूप में सामने आ रही है। उन्होंने इसे जनहितकारी शासन व्यवस्था का उदाहरण बताया।

कल्याण सिंह का राजनीतिक और नैतिक व्यक्तित्व:
मंत्री ने कहा कि कल्याण सिंह केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि वे सिद्धांत, साहस और नैतिक मूल्यों के प्रतीक थे। वे समाज और राष्ट्र के हित को अपने निजी या राजनीतिक हित से ऊपर रखते थे। उनके शासनकाल की नीतियां किसी एक वर्ग या परिवार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सभी वर्गों के कल्याण के लिए थीं। उन्होंने परिवारवाद के बजाय योग्यता और सेवा को राजनीति का आधार बनाया।

भ्रष्टाचार और माफियाराज के खिलाफ रुख:
अपने संबोधन में संदीप सिंह ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश भ्रष्टाचार, जातिवाद और माफियाराज से जूझ रहा था, तब कल्याण सिंह ने कानून के राज और प्रशासनिक अनुशासन की स्पष्ट दिशा दी। उन्होंने सुशासन को केवल एक प्रशासनिक शब्द नहीं, बल्कि कमजोर और वंचित वर्गों की सुरक्षा और आत्मसम्मान से जोड़ा। अपराध और अन्याय के खिलाफ उनका रुख हमेशा स्पष्ट और निर्भीक रहा।

श्रीराम मंदिर आंदोलन और ऐतिहासिक निर्णय:
श्रीराम मंदिर आंदोलन का उल्लेख करते हुए संदीप सिंह ने कहा कि प्रभु श्रीराम की सेवा उसे ही प्राप्त होती है, जिसे स्वयं प्रभु चुनते हैं। उनके अनुसार अयोध्या आंदोलन के लिए प्रभु ने कल्याण सिंह को चुना था। उन्होंने यह भी कहा कि करसेवकों पर बल प्रयोग न करने और गोली न चलाने का निर्णय ऐतिहासिक था। उस निर्णय की जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं अपने ऊपर ली, जबकि वे चाहें तो सत्ता बचा सकते थे।

सत्ता से ऊपर आस्था और नैतिकता:
उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री के लिए उस समय करसेवकों को रोकना संभव था, लेकिन बाबूजी ने सत्ता से ऊपर आस्था और नैतिक मूल्यों को रखा। यही कारण है कि आज श्रीराम मंदिर अपने भव्य स्वरूप में सनातन संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बनकर सामने है।

विपक्ष पर सीधा प्रहार:
विपक्ष पर टिप्पणी करते हुए संदीप सिंह ने कहा कि जो लोग आज पीडीए की बात कर रहे हैं, उन्होंने अपने शासनकाल में पिछड़े वर्गों को वास्तविक लाभ नहीं पहुंचाया। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए ऐसे दलों ने पिछड़ों का शोषण किया और उन्हें कल्याणकारी योजनाओं से दूर रखा। इसके विपरीत कल्याण सिंह ने बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया।

समरसता आधारित सुशासन का मॉडल:
संदीप सिंह ने कहा कि कल्याण सिंह ने समरसता आधारित सुशासन की मजबूत नींव रखी। उनका मानना था कि शासन का उद्देश्य समाज को जोड़ना और सभी को समान अवसर देना होना चाहिए। यही कारण है कि आज भी उनकी नीतियों और निर्णयों को उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

कार्यक्रम का संदेश और प्रभाव:
कन्नौज में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक स्मृति आयोजन नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से वर्तमान राजनीति और प्रशासन को एक वैचारिक संदर्भ देने का प्रयास किया गया। वक्ताओं ने यह स्पष्ट किया कि आस्था, कानून और सुशासन का आपसी संबंध उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है और आगे भी निभाता रहेगा।

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