रिपोर्टर: जेड ए खान
अलीगढ़ (Aligarh) के ब्लॉक अकराबाद (Akrabad) में ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा शुक्रवार को खंड विकास अधिकारी कार्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया गया। ग्राम पंचायत एवं ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति के तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में अधिकारियों ने अपनी दस सूत्रीय मांगों को सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन एडीओ टीपी सिंह को सौंपा। अधिकारियों ने ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था और गैर-विभागीय कार्यों को थोपे जाने का विरोध दर्ज कराते हुए अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया:
ज्ञापन ब्लॉक अकराबाद की ग्राम पंचायत अधिकारियों की अध्यक्षा कुमारी आरती ने एडीओ टीपी सिंह को सौंपा। इस ज्ञापन की प्रतियां प्रमुख सचिव पंचायती राज (Panchayati Raj), प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास विभाग (Rural Development Department), आयुक्त ग्राम्य विकास (Commissioner Rural Development), निदेशक पंचायती राज (Director Panchayati Raj) और प्रदेश अध्यक्ष/महामंत्री राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश (State Employees Joint Council Uttar Pradesh, Lucknow) को भी प्रेषित की गईं।
ऑनलाइन उपस्थिति और अतिरिक्त कार्यों का विरोध:
प्रदर्शन के दौरान ग्राम पंचायत अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लगातार बढ़ रही ऑनलाइन उपस्थिति की बाध्यता और विभागीय दायरे से बाहर किए जा रहे गैर-विभागीय कार्य उनके कार्य संचालन को प्रभावित कर रहे हैं। इसी के विरोध में उन्होंने काली पट्टी बांधकर सरकार के समक्ष अपनी असहमति को लोकतांत्रिक तरीके से प्रस्तुत किया। अधिकारियों का कहना था कि इस प्रकार के दबावपूर्ण कार्यों से न केवल उनके दायित्व प्रभावित होते हैं, बल्कि कार्यों की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
अधिकारियों की सहभागिता:
दस सूत्रीय मांगों को लेकर किए गए इस विरोध और ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया में ग्राम पंचायत अधिकारी राजीव यादव, प्रशांत कुमार, तबरेज महबूब, शैलेन्द्र सिंह, राजेन्द्र सिंह, अरविन्द सिंह, किशनपाल सिंह, विक्रम सिंह, सतेन्द्र सिंह और दीनदयाल सहित अन्य अधिकारियों ने सहभागिता की। विरोध की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने ग्राम सचिव ग्रुप से स्वयं को अलग करने का निर्णय भी लिया, जिससे सरकार को उनके असंतोष का स्पष्ट संदेश जा सके।
आंदोलन की चेतावनी:
प्रदर्शन कर रहे अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी दस सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आगे और अधिक उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ग्राम पंचायत अधिकारियों का कहना है कि उनकी मांगें उनके कार्य निष्पादन और कार्य परिवेश से जुड़ी हुई हैं, इसलिए सरकार को इन पर तत्काल ध्यान देना आवश्यक है।
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