नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद परिवार ने देश छोड़ दिया है। घटना के लगभग एक महीने बाद पिता राज कुमार मेहता और उनकी बेटी 14 फरवरी को लंदन रवाना हो गए। जिस फ्लैट में परिवार रहता था, वहां अब ताला लगा है और कोई मौजूद नहीं है। उनके विदेश जाने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।
16 जनवरी की रात क्या हुआ:
घटना 16 जनवरी की देर रात की है। नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एससी-02 A3 प्लॉट के बेसमेंट में युवराज मेहता की कार पानी में डूब गई थी। कार डूबने के दौरान उन्होंने खुद को बचाने के लिए वाहन की छत पर चढ़कर पिता को कॉल किया। सूचना मिलते ही पिता मौके पर पहुंचे और पुलिस व फायर ब्रिगेड को जानकारी दी। राहत और बचाव दल भी पहुंचा, लेकिन घंटों की कोशिश के बावजूद युवराज को सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका। वह अपने पिता और बचाव टीम के सामने ही पानी में डूब गए। अगले दिन सुबह उनका शव बरामद किया गया।
एसआईटी का गठन और रिपोर्ट:
घटना के तीन दिन बाद, 19 जनवरी को जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया। एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण सहित तीन विभागों से 22 से अधिक प्रश्न पूछे। नोएडा प्राधिकरण ने लगभग 150 पन्नों की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि पुलिस विभाग ने 450 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। एसआईटी का प्रमुख सवाल यह रहा कि बचाव कार्य में करीब दो घंटे की देरी क्यों हुई। इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर संबंधित अधिकारियों की ओर से नहीं दिया जा सका।
रिपोर्ट में सिस्टम फेल्योर की बात:
सूत्रों के अनुसार जांच में यह संकेत मिला कि मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि तंत्र की विफलता से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। एसआईटी ने रिपोर्ट का विश्लेषण कर 27 जनवरी को इसे योगी आदित्यनाथ को सौंप दिया। रिपोर्ट में कुछ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी चिन्हित किए जाने की चर्चा है। हालांकि अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
सरकार की प्रतिक्रिया और जांच टीम:
घटना के दो दिन बाद मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की। इसमें मेरठ मंडलायुक्त भानु चंद गोस्वामी और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को शामिल किया गया। टीम को पांच दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था।
परिवार की स्थिति और मौजूदा हालात:
घटना के बाद युवराज के पिता राज कुमार मेहता मीडिया के सामने आए थे और एसआईटी गठन पर संतोष जताया था। अब उनके लंदन जाने से कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। घटना स्थल पर नोएडा प्राधिकरण ने बैरिकेडिंग, क्रैश बीम बैरियर, लेन मार्किंग और रिफ्लेक्टर लगाए हैं, लेकिन टूटे हुए नाले की दीवार का निर्माण अब तक नहीं हुआ है। नाले का पानी अभी भी खाली प्लॉट में भर रहा है। पानी निकासी के लिए सिंचाई विभाग के साथ रेगुलेटर निर्माण का अनुबंध किया गया है।
पूरे प्रकरण में जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार बना हुआ है। परिवार के विदेश जाने और प्रशासनिक पहलुओं को लेकर यह मामला लगातार चर्चा में है।
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