बलिया पहुंची चौरी चौरा से मनरेगा बचाओ यात्रा, सांसद सनातन पाण्डेय से की मुलाकात

रिपोर्टर: अमित कुमार

उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में मनरेगा को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है। चौरी चौरा से निकली मनरेगा बचाओ साइकिल यात्रा बलिया पहुंची, जहां 20 सदस्यों की टीम ने समाजवादी पार्टी के सांसद Sanatan Pandey (सनातन पाण्डेय) से मुलाकात कर अपनी मांगों को रखा। साइकिल यात्रा में शामिल लोगों ने सरकार से मजदूर विरोधी बताए जा रहे VB-G RAM G कानून को वापस लेने और मनरेगा तथा मजदूर अधिकारों पर हो रहे हमले को बंद करने की मांग उठाई। यह यात्रा चौरी चौरा से शुरू होकर बलिया होते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi (नरेन्द्र मोदी) के संसदीय क्षेत्र Varanasi (वाराणसी) तक जाने का लक्ष्य लेकर निकली है।

साइकिल यात्रा का उद्देश्य:
यात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि यह अभियान केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं, बल्कि ग्रामीण मजदूरों की आवाज को सत्ता तक पहुंचाने का प्रयास है। साइकिल यात्रा के माध्यम से वे गांव-गांव जाकर मनरेगा के महत्व को लोगों के सामने रख रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार की नीतियों के कारण मजदूरों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं, जिसे लेकर जनजागरूकता जरूरी है।

बलिया में सांसद से मुलाकात:
बलिया पहुंचने पर साइकिल यात्रा में शामिल प्रतिनिधिमंडल ने Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) के सांसद Sanatan Pandey (सनातन पाण्डेय) से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मांग की कि मनरेगा और मजदूरों के मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाया जाए। यात्रियों ने कहा कि मौजूदा नीतियों से ग्रामीण मजदूरों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है और इसका असर सीधे उनके जीवन पर पड़ रहा है।

मनरेगा को बताया ऐतिहासिक कानून:
यात्रा में शामिल लोगों ने बताया कि वर्ष 2005 में लागू हुआ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ग्रामीण भारत के लिए क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया था। इस कानून के तहत पहली बार ग्रामीण मजदूरों को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिली। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी तय की गई और यदि काम नहीं मिला तो भत्ता पाने का अधिकार भी दिया गया।

पलायन पर रोक लगाने में भूमिका:
साइकिल यात्रा में शामिल कार्यकर्ताओं का कहना है कि मनरेगा ने गांवों से होने वाले पलायन को कम करने में अहम भूमिका निभाई। रोजगार की गारंटी मिलने से मजदूरों को अपने गांव में ही काम मिलने लगा, जिससे उन्हें शहरों की ओर मजबूरी में पलायन नहीं करना पड़ा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली और मजदूरों की सौदेबाजी की स्थिति बेहतर हुई।

मजदूरी अधिकारों में आया बदलाव:
कार्यकर्ताओं का कहना है कि मनरेगा की वजह से मजदूर अब गांव और शहर दोनों जगह अपनी उचित मजदूरी की मांग करने की स्थिति में आ पाए। न्यूनतम मजदूरी तय होने से मजदूरों को एक आधार मिला, जिससे शोषण में कमी आई। उनके अनुसार, यह कानून केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि मजदूरों के आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ था।

कोरोना काल में मनरेगा की भूमिका:
यात्रा में शामिल लोगों ने कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि उस कठिन समय में जब गरीब और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, तब मनरेगा ने उनके लिए सहारा प्रदान किया। उनका आरोप है कि महामारी के दौरान सरकार की नीतियों के चलते कई मजदूर बेसहारा हो गए थे, ऐसे में मनरेगा ही ऐसा माध्यम था जिसने उन्हें कुछ हद तक राहत दी।

VB-G RAM G कानून पर विरोध:
साइकिल यात्रा निकाल रहे लोगों का कहना है कि VB-G RAM G कानून मजदूर विरोधी है और इससे मनरेगा की मूल भावना कमजोर होती है। उनका आरोप है कि इस तरह के प्रावधान मजदूरों के अधिकारों पर हमला हैं। इसी के विरोध में यह साइकिल यात्रा निकाली जा रही है, ताकि सरकार तक यह संदेश पहुंचे कि मजदूर अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं।

वाराणसी तक जाएगी यात्रा:
आयोजकों के अनुसार, यह साइकिल यात्रा चौरी चौरा से शुरू होकर बलिया के बाद वाराणसी तक जाएगी। प्रधानमंत्री Narendra Modi (नरेन्द्र मोदी) के संसदीय क्षेत्र तक पहुंचकर वे अपनी मांगों को और व्यापक स्तर पर उठाने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मजदूरों के अधिकार सुरक्षित नहीं होते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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