पातार (Patar) ग्राम सभा में आवासीय पट्टा रद्द होने के बाद 38 ग्रामीण परिवारों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिला प्रशासन की ओर से जमीन खाली करने का आदेश मिलने के बाद प्रभावित परिवारों में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर वे वर्षों से रह रहे हैं, उसके अलावा उनके पास रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है। ऐसे में जमीन खाली करने का आदेश उनके लिए गंभीर संकट बन गया है और वे शासन-प्रशासन से लगातार गुहार लगा रहे हैं।

आवासीय पट्टा रद्द होने से बढ़ी मुश्किलें:
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023 में उन्हें यह भूमि आवासीय पट्टे के रूप में आवंटित की गई थी। पट्टा मिलने के बाद सभी 38 परिवारों ने उसी भूमि पर झोपड़ियां डालकर अपना बसेरा बनाया। समय के साथ यही जगह उनका स्थायी आश्रय बन गई। अब अचानक प्रशासन की ओर से यह कहकर पट्टा निरस्त कर दिया गया है कि यह भूमि खेल के मैदान के रूप में दर्ज है। पट्टा रद्द होने की सूचना मिलते ही ग्रामीणों के सामने बेघर होने का खतरा खड़ा हो गया है।
प्रशासन के नोटिस से ग्रामीणों में चिंता:
पट्टा निरस्त किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित परिवारों को जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया है। नोटिस मिलने के बाद ग्रामीणों में चिंता और भय का माहौल है। उनका कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के जमीन खाली करना संभव नहीं है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वे यहां से हटाए गए तो उनका ठिकाना कहां होगा।
हाईकोर्ट में चल रहा मामला:
आवासीय पट्टा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ ग्रामीणों ने High Court (हाईकोर्ट) का रुख किया है। इस मामले को लेकर न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रशासन द्वारा जमीन खाली कराने की कार्रवाई उचित नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से नोटिस जारी होने से उनका भरोसा डगमगाने लगा है।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग:
ग्रामीण लगातार यह मांग कर रहे हैं कि यदि किसी कारणवश पट्टा निरस्त किया गया है तो उन्हें वैकल्पिक भूमि आवंटित की जाए। उनका कहना है कि उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया और प्रशासन द्वारा दी गई भूमि पर ही उन्होंने अपने घर बनाए थे। ऐसे में अचानक बेदखल किया जाना उनके साथ अन्याय के समान है।
मंत्री का बयान और उम्मीदें:
जफराबाद (Jaunpur) विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं कैबिनेट मंत्री OP Rajbhar (ओपी राजभर) ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में आवासीय पट्टा निरस्त हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जिन लोगों के पास अपनी कोई निजी भूमि नहीं होती, उनके लिए दूसरी जगह भूमि आवंटन की व्यवस्था की जाती है। इस बयान के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि प्रशासन उनकी स्थिति को समझते हुए कोई सकारात्मक निर्णय लेगा।
बेघर होने का डर और प्रशासन से गुहार:
फिलहाल पातार (Patar) ग्राम सभा के ये 38 परिवार प्रशासन के फैसले के बीच फंसे हुए हैं। एक ओर न्यायालय में मामला चल रहा है, तो दूसरी ओर जमीन खाली करने का दबाव बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन बिना पुनर्वास के उन्हें हटाना सामाजिक रूप से गलत होगा। अब सभी की नजरें प्रशासन और शासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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