भाजपा ने अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण साधने के लिए चंद्रभानु पासवान को प्रत्याशी बनाया है। उन्हें टिकट देकर पार्टी ने मैसेज दिया है कि वह छोटे कार्यकर्ता को भी चुनाव का चेहरा बना सकती है।BJP इस मुद्दे को उपचुनाव में भुनाएगी। मिल्कीपुर में BJP के टिकट के लिए कई अनुभवी दावेदार थे। बड़ा सवाल है कि चंद्रभानु को टिकट की दौड़ में सबसे आगे पहुंचाने वाले बड़े फैक्टर क्या रहे?
बता दें कि जब भाजपा की जिला कोर कमेटी ने अयोध्या के लिए संभावित प्रत्याशी का पैनल प्रदेश मुख्यालय भेजा। इसमें पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ, पूर्व विधायक रामू प्रियदर्शी, जिला महामंत्री राधेश्याम, अनुसूचित जाति मोर्चा के कोषाध्यक्ष चंद्रकेश रावत और चंद्रभानु पासवान का नाम शामिल था। एक नाम परिवहन विभाग के उपायुक्त सुरेंद्र कुमार का भी था। हालांकि, इन्हें पैनल में शामिल नहीं किया गया है। BJP संगठन चंद्रभान को चुनाव लड़वा रहा है। यही वजह है कि मिल्कीपुर के चुनावी मैदान में मंत्री सूर्य प्रताप साही की अगुआई में 6 मंत्रियों को लगाया है। इनमें जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, सहकारिता राज्यमंत्री जेपीएस राठौड़, आयुष मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह और सतीश शर्मा शामिल हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक भी प्रचार अभियान में सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगे।
चंद्रभानु का नाम सामने आने के बाद कहा जाने लगा है कि यह फ्रेशर बनाम अनुभव की लड़ाई बन रही है। क्योंकि सपा कैंडिडेट अजीत प्रसाद को उनके पिता अवधेश प्रसाद चुनाव लड़वा रहे हैं। जोकि खुद मिल्कीपुर सीट से विधायक रहे हैं। फैजाबाद के मौजूदा सांसद हैं। इधर, चंद्रभानु का यह पहला चुनाव है। उन्हें पूरा BJP संगठन चुनाव लड़वा रहा है।
उपचुनाव में BJP कैंडिडेट फाइनल करते वक्त सबसे बड़ा फैक्टर जातिगत समीकरण का भी रहा। मिल्कीपुर क्षेत्र में करीब एक लाख दलित मतदाता हैं, इनमें 55 हजार से अधिक पासी मतदाता हैं। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर दोनों ही दलों ने पासी समाज को साधने के लिए यह दांव खेला। सपा पहले ही अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को उतार चुकी है। भाजपा इसको मुद्दा बनाएगी कि एक तरफ सांसद के बेटे को सपा ने टिकट दिया। जबकि हमने एक BJP के सामान्य कार्यकर्ता को टिकट दिया। इधर चंद्रशेखर ने भी अपना प्रत्याशी उतार दिया है। उन्होंने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से संतोष कुमार उर्फ सूरज चौधरी को टिकट दिया है। संतोष का मुकाबला सपा प्रत्याशी अजीत प्रसाद और भाजपा के चंद्रभानु पासवान से होगा।
संतोष कुमार भी पासी हैं। यानी, अब अयोध्या में तीनों प्रत्याशी पासी समुदाय से हैं। संतोष कुमार पहाड़गंज के रहने वाले हैं। उन्होंने सपा से बगावत के बाद पिछले महीने दिसंबर में पार्टी छोड़ दी थी। संतोष कुमार ने सांसद अवधेश प्रसाद पर परिवारवाद का आरोप भी लगाया था। इसके बाद हाल में ही आजाद समाज पार्टी जॉइन की थी। संतोष की उम्र 36 साल है। उनके पिता का नाम साहब प्रसाद है। मां का नाम चौला देवी और पत्नी का नाम काजल है। वह अयोध्या में रहते हैं। लेकिन मूल रूप से मिल्कीपुर परसपुर सतराह के निवासी हैं। इसके पहले उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा है। एक बार बसपा से विधानसभा का टिकट मिला था। हालांकि, फिर कट गया था।
मिल्कीपुर में सबसे मजबूत दावेदार बाबा गोरखनाथ माने जा रहे थे। मगर आंतरिक खींचतान में मात खा गए। BJP के पूर्व सांसद लल्लू सिंह और गोरखनाथ के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। लल्लू सिंह नहीं चाहते थे कि बाबा गोरखनाथ का टिकट फाइनल हो। भले ही लल्लू सिंह लोकसभा चुनाव हार गए। मगर BJP संगठन में उनके सुझाव सुने जाते हैं। उन्होंने चंद्रभानु के लिए पैरवी की। रुदौली के BJP विधायक रामचंद्र यादव ने भी चंद्रभानु को सपोर्ट किया। रिजन यह रहा जब लोकसभा चुनाव 2024 में BJP कैंडिडेट चुनाव हारे, तब भी रुदौली तहसील में BJP अपना वोट बैंक बचाने में कामयाब रही। इसी रुदौली सीट से चंद्रभानु आते हैं। लोकसभा में चंद्रभानु को दलित बहुल 75 बूथों पर चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी मिली थी। इसमें से 65 बूथों पर भाजपा को जीत मिली थी।




