फौजी पिता को मासूम बेटे ने दी मुखाग्नि, मेरठ में हजारों ने रोते-रोते किया अंतिम संस्कार!

जम्मू-कश्मीर में तैनात भारतीय सेना के जवान का पार्थिव शरीर सोमवार को मेरठ (Meerut) स्थित उनके पैतृक आवास पहुंचा, जहां अंतिम विदाई के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। साढ़े चार साल के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के समय जब मासूम बेटे ने पिता के मुंह में गंगा जल डाला तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। पूरा गांव शोक में डूबा नजर आया।

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान बेटा कभी लेटाए गए अपने पिता को देखता रहा तो कभी आसपास खड़ी भीड़ को निहारता रहा। परिवार की पीड़ा देखकर हर कोई भावुक हो उठा।

हादसे में हुई जवान की मृत्यु:
किठौर क्षेत्र के भड़ौली गांव (Bhadauli Village) निवासी हवलदार राहुल भड़ाना (33) भारतीय सेना (Indian Army) में तैनात थे। उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के अखनूर (Akhnoor) जिले में थी। सेना से प्राप्त जानकारी के अनुसार राहुल छुट्टी के दौरान हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में यात्रा पर गए थे। यात्रा के दौरान डमटाल (Damtal) क्षेत्र में सड़क हादसे में उनका निधन हो गया।

परिजनों को हादसे की सूचना सेना की ओर से दी गई। इसके बाद पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ मेरठ लाया गया, जहां अंतिम संस्कार किया गया।

परिवार का हाल बेहाल:
अंतिम संस्कार के समय मां और पत्नी बदहवास होकर रोती रहीं। पिता मौन खड़े अपने जवान बेटे के पार्थिव शरीर को निहारते रहे। भाई और बहनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। राहुल तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे और उनकी चार बहनें हैं। परिवार के इस गहरे दुख ने पूरे गांव को शोकाकुल कर दिया।

किसान नेता पवन गुर्जर ने बताया कि राहुल 2016 में सेना में भर्ती हुए थे। पिछले लगभग 10 वर्षों में वे विभिन्न स्थानों पर तैनात रहे। हाल के दिनों में वे जम्मू-कश्मीर के अखनूर क्षेत्र में सेवाएं दे रहे थे। शनिवार को सड़क हादसे में उनका निधन हो गया।

पत्नी और मासूम बेटे को छोड़ गए:
राहुल की शादी करीब साढ़े पांच वर्ष पहले अमरोहा (Amroha) निवासी सोनल से हुई थी। उनका साढ़े चार वर्ष का एक बेटा है, जिसका नाम दिव्यांश है। अंतिम संस्कार के दौरान बेटे द्वारा दी गई मुखाग्नि का दृश्य उपस्थित लोगों को भावुक कर गया।

गांव ने दी नम आंखों से विदाई:
जवान को अंतिम विदाई देने के लिए आसपास के कई गांवों के लोग पहुंचे। अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने अपने घरों की छतों से फूल बरसाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। लोग “जब तक सूरज चांद रहेगा, राहुल फौजी का नाम रहेगा” के नारे लगाते हुए अंतिम यात्रा में शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में शोक और गर्व का मिला-जुला माहौल दिखाई दिया।

राहुल भड़ाना की असमय मृत्यु से परिवार और गांव के लोगों में गहरा दुख है। अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान और सैन्य सम्मान के साथ संपन्न हुआ।


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