लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर BSP प्रमुख Mayawati सुर्खियों में हैं। जहां एक ओर उन्होंने हाल ही में हुई अपनी रैली में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार की कार्यशैली की तारीफ की और ऐलान किया कि 2027 का विधानसभा चुनाव बसपा अकेले लड़ेगी, वहीं अब उन पर षड्यंत्र रचने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मायावती की यह रैली एक “नई सियासी दिशा” का संकेत थी, लेकिन इसी बीच दलित IPS अधिकारी Y Puran Kumar की आत्महत्या ने माहौल को गरमा दिया। इस अफसर ने अपने सुसाइड नोट में जातीय भेदभाव और अपमान का ज़िक्र किया था।
जहां इस पर AAP नेता संजय सिंह और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आवाज उठाई, वहीं मायावती ने अब तक इस पर चुप्पी साध रखी है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या दलितों के मुद्दे अब बसपा की प्राथमिकता में नहीं रहे?
इधर जय हिंद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदलाल निषाद ने तीखा बयान देते हुए कहा कि “मायावती ने अपना जमीर भी बेच दिया है।” वहीं समाजसेवी गणेश दत्त मिश्र ने कहा, “जिनका परिवार नहीं होता, वे देश-प्रदेश नहीं चला सकते, बिना परिवार वाले अब एकजुट हो गए हैं।”
हालांकि, लोजपा (रामविलास) के युवा प्रदेश अध्यक्ष सिद्धिनाथ मिश्रा ने कहा कि “मायावती ने मंच से सच बोला और जनता को वास्तविकता बताई।”
दलित समाज में बढ़ते असंतोष और राजनीतिक रणनीतियों के इस टकराव ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है।
अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या मायावती इन आरोपों और घटनाओं पर खुलकर सामने आएंगी या फिर खामोशी ही उनकी नई रणनीति का हिस्सा है।
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