क्या RSS की तरह रणनीति बना रहीं मायावती? MY फॉर्मूला का काट लाने की तैयारी…

लखनऊ में हुई रैली में मायावती( Mayawati ) के लिए उमड़ी भीड़ ने राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी। बताया गया कि रैली में पहुंचे लोग अपने साथ रोटियां तक बांधकर आए थे, जो इस जनसमर्थन के बढ़े हुए उत्साह को दिखाता है। आमतौर पर रैलियों में भीड़ तभी इकट्ठी होती है, जब खाने-पीने की व्यवस्था अच्छी हो, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल अलग दिखी। वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री( Amitabh Agnihotri ) इसे मायावती की सक्रिय राजनीति में वापसी का संकेत बता रहे हैं और इसे बसपा( BSP ) की नहीं बल्कि मायावती-केंद्रित रैली मानते हैं।
पार्टी के एक नेता बताते हैं कि मायावती जल्द यूपी के सभी 18 मंडलों और पश्चिम यूपी के कई जिलों में नाइट कैंपिंग करेंगी। उनका कहना है कि पिछली बार चुनाव के ठीक पहले कुछ रैलियां हुई थीं, लेकिन इस बार योजना है कि कार्यक्रमों की संख्या कहीं अधिक हो।
2007 के बाद से मायावती की राजनीतिक सक्रियता लगातार कम होती गई, जिसका असर बसपा की सीटों और वोट शेयर पर भी दिखता है। 2007 में 206 सीट और 30.4% वोट शेयर से शुरू हुआ सफर 2022 आते-आते 1 सीट और 13% वोट शेयर तक सिमट गया। 2027 के चुनावों को लेकर अब उनकी रणनीति क्या है, वे किसे अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानती हैं और क्या इस बार वे घर-घर पहुंचने की तैयारी कर रही हैं—इन सवालों पर अब राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।

सक्रियता का नया दौर शुरू:
बसपा के भीतर मौजूद सूत्र बताते हैं कि मायावती अभी से चुनावी तैयारी में जुट चुकी हैं। 9 अक्टूबर को लखनऊ और 19 नवंबर को दिल्ली में हुई बैठकों को इस शुरुआत का हिस्सा बताया जा रहा है। सूत्र कहते हैं कि यह तो शुरुआत है, आगे का दौर और ज्यादा तेज दिखेगा।
उनके मुताबिक मायावती समझ चुकी हैं कि अगर दलित राजनीति में खाली जगह छोड़ी, तो कोई और उस पर कब्जा कर सकता है। यही वजह है कि अब वे पारंपरिक दलित वोटर ही नहीं, मुसलमान वोटर को भी साथ रखने की रणनीति बना रही हैं।

6 रैलियां और 20 बैठकें तय:
सूत्रों का कहना है कि अगले एक साल में मायावती कम से कम 6 बड़ी रैलियां और 20 मंडल-स्तरीय बैठकें करेंगी। इसके अलावा संभव है कि वे कार्यकर्ताओं के घर जाकर भी संवाद करें और उनका मनोबल बढ़ाएं।

18 मंडलों में नाइट कैंपिंग की तैयारी:
सीनियर पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री बताते हैं कि मायावती इस बार 18 मंडलों में नाइट कैंप करेंगी। यह शैली उन्होंने केवल कांशीराम के साथ रहते अपनाई थी। लंबे समय बाद वे कार्यकर्ताओं के बीच वैसे ही उतरने की तैयारी में हैं, जैसे शुरुआती दौर में उतरती थीं।
यह नाइट कैंपिंग केवल बैठकों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि कार्यकर्ताओं के साथ समय बिताकर ऊर्जा वापस जगाने की कोशिश होगी। बसपा नेताओं का दावा है कि फरवरी-मार्च 2026 से ही रैलियों का सिलसिला तेज हो जाएगा।

नाइट कैंपिंग के चार बड़े उद्देश्य:

  1. कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच बने अंतर को खत्म कर संवाद बढ़ाना।
  2. मैदानी फीडबैक लेकर चुनावी रणनीति को मजबूत करना।
  3. संगठन का विस्तार और नए लोगों को जोड़ना।
  4. दलित वोटर को भरोसा दिलाना कि मायावती फिर सक्रिय हैं और उनके हक की लड़ाई फिर जोर से लड़ी जाएगी।

DM फार्मूले पर काम शुरू:
सूत्र बताते हैं कि इस बार मायावती मुस्लिम समुदाय के साथ मजबूत तालमेल बनाने के प्रयास में हैं। चर्चा है कि AIMIM प्रमुख ओवैसी( Owaisi ) के साथ सीटों पर बातचीत लगभग तय हो चुकी है। बसपा प्रवक्ता एमएच खान( MH Khan ) का कहना है कि बसपा हमेशा मुसलमानों के हितों का ध्यान रखती आई है, जबकि गठबंधन पर अंतिम फैसला मायावती करेंगी।
अमिताभ अग्निहोत्री बताते हैं कि दलित-मुस्लिम गठजोड़ लगभग 23-24% वोट शेयर बना सकता है, जो यूपी में चुनावी गणित को बड़े पैमाने पर प्रभावित करता है।

यादव वोटरों बनाम दलित-मुस्लिम समीकरण:
बसपा के युवा दलित कार्यकर्ता का कहना है कि यह समीकरण सपा( SP ) के लिए सबसे बड़ा खतरा बनेगा। उनके अनुसार दलित तबका सबसे ज्यादा यादवों द्वारा दबाव महसूस करता है, इसलिए यह गठजोड़ सपा को कमजोर करेगा।
बसपा की टीमें पहले से ही घर-घर जाकर शांत तरीके से काम कर रही हैं। उनका उद्देश्य है कि चुनाव से छह महीने पहले ठोस आंकड़े और आधार तैयार हो जाए।

RSS जैसी चुप रणनीति:
कार्यकर्ता बताते हैं कि RSS की तरह चुपचाप और अनुशासित तरीके से नेटवर्क मजबूत किया जा रहा है। उनका कहना है कि सीखने जैसी चीजें किसी भी संगठन से ली जा सकती हैं।

तीन नेताओं की तिगड़ी फिर सक्रिय:
सूत्र बताते हैं कि इस समय मायावती, उनके भतीजे आकाश( Akash ) और सतीश चंद्र मिश्रा( Satish Chandra Mishra ) की तिगड़ी संगठन में सबसे सक्रिय है। मिश्रा ने आकाश के साथ मतभेद मिटाने में भूमिका निभाई है। बताया जा रहा है कि आने वाले दौर में मायावती कार्यकर्ताओं और वोटरों को यह संदेश देंगी कि भविष्य में आकाश उनकी विरासत आगे ले जाएंगे।

BJP की बी-पार्टी वाले आरोप पर जवाब:
बसपा प्रवक्ता एमएच खान आरोपों को विपक्ष का दुष्प्रचार बताते हैं। उनका कहना है कि बसपा BJP की बी-पार्टी नहीं, बल्कि उसके खिलाफ चुनाव लड़ेगी।
हालांकि एक पार्टी स्रोत कहता है कि बसपा का पहला लक्ष्य सपा को चुनौती देना है और राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता।

पुराने साथी की टिप्पणी:
मायावती के साथ लंबा समय काम कर चुके नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि मायावती की रणनीति को समझना आसान नहीं है, और उनकी चाल हमेशा अप्रत्याशित रहती है।

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Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

By Abhinendra

Journalist

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