Lucknow/Mau : वो होनहार थी, वो गंभीर थी, वो सुलझी हुई थी. शिक्षा में अव्वल थी, उसके कामयाबी के किस्से गाँव के हर शख्स के जुबां पर थे. अपनी मेहनत और काबिलियत से वो जज बनी थी. पुरे गाँव को उसपर नाज़ है. पता है जब वो जज बनी तो गाँव आई थी. उसके चेहरे पर तेज था, मासूमियत थी. जज बनने का अहंकार बिलकुल भी नहीं था. वो वही ज्योत्सना थी, जो सबकी लाडली थी. लेकिन उसने अपने जीवन का अंत क्यों किया ? क्या किसी और ने उसे …
उत्तर प्रदेश के जनपद मऊ के तराईडीह गांव निवासी महिला जज ज्योत्सना राय की मौत की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया। घटना को लेकर चर्चा होती रही। ज्योत्सना राय बदायूं में सिविल जज जूनियर डिवीजन न्यायालय में तैनात थीं। शनिवार की सुबह उनका शव सरकारी आवास में फंदे से लटकता मिला। घटना के समय मृतका के परिजन गांव में नहीं थे, लेकिन गांव की बेटी का इस तरह जाना सभी को हैरान कर दिया। सूचना से गांव का हर व्यक्ति आहत दिखा। उधर, घटना की जानकारी मिलते ही सिविल जज की मौत की सूचना मिलने पर वाराणसी में तैनात इंजीनियर भाई और लखनऊ में रह रहे पिता बंदायूं के लिए रवाना हुए।
कैसे हुई जज ज्योत्सना राय की मौत?
बीते शनिवार सुबह बदायूं न्यायालय में सिविल जज जूनियर के पद पर तैनात ज्योत्सना राय कोर्ट नहीं पहुंची. उनके साथी जजों ने उन्हें फोन किया. मगर उनका फोन नहीं उठा. फिर उनके घर पर कर्मचारियों को भेजा गया. महिला जज के कमरे का गेट अंदर से बंद था. अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस को भी जानकारी दे दी गई. मौके पर आई पुलिस ने कमरे का गेट तोड़ा तो महिला जज का शव पंखे से लटका हुआ था. महिला जज की मौत हो गई थी. माना जा रहा है था कि महिला जज ने कथित फांसी लगाकर अपनी जान दी है. पुलिस को सुसाइड नोट भी मिला था.
हैरान हो गये परिजन …
इस घटना को लेकर मृतका के पिता के चचेरे भाई विपिन उर्फ पिंकू राय ने बताया कि उनकी भतीजी बेहद गंभीर और सुलझी हुई युवती थी। जज बनने के बाद बीते साल ही वह गांव में पूजा करने के लिए अपने पूरे परिवार के साथ आई थी। बताया कि उसके भाई अशोक कुमार राय अभियोजन विभाग में पीओ पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भाभी पूनम राय के साथ रहते हैं। जबकि भतीजा शशांक शेखर वाराणसी में डीएलडब्लू में इंजीनियर है, वह अपनी पत्नी के साथ वहीं रहता है। बताया कि ज्योत्सना के जज बनने से पूरे गांव में हर्ष का माहौल था, आज उसके असमय जाने से हर कोई सकते में है। वहीं ज्योत्सना के पैतृक घर की रखवाली करने वाले रामाशीष यादव ने बताया कि बीते साल बेटी रानी जज बनने के बाद गांव आई थीं, पूरे गांव में उनके आने की सूचना पर सभी खुश थे। बताया कि उनकी बिटिया रानी बेहद कोमल स्वभाव की थी, भावुक होते हुए बताया कि भले ही ज्योत्सना जज बन गई थीं, लेकिन उनके स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया था।
घर पर कोई नहीं, फिर भी सूचना मिलने पर उमड़ती रही भीड़
घटना के समय भले ही मृतका का परिवार अपने पैतृक गांव में नहीं था, लेकिन ज्योत्सना राय की मौत की सूचना मिलने पर गांव के अलावा आसपास के लोग और रिश्तेदार उनके घर पहुंचते रहे। वहां मौजूद हर शख्स के जुबान पर था, अचानक क्या हुआ, जो इतनी होनहार बेटी ने इतना बड़ा कदम उठाया। मृतका ज्योत्सना राय के पिता अशोक राय पांच भाई में तीसरे नंबर पर हैं। इसमें ज्योत्सना के पिता के अलावा उसके चाचा सतीश अभियोजन अधिकारी हैं। जबकि बड़े पापा सुरेश भी शासकीय अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हैं, वहीं डॉ. रामाशीष राय लखनऊ मे डॉक्टर हैं।
हत्या या आत्महत्या ? अनसुलझी मौत की गुत्थी !
महिला जज, सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर तैनात थीं. महिला जज की मौत के बाद हड़कंप मच गया था. अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है.
बता दें कि महिला जज के पिता ने बेटी की हत्या का केस दर्ज करवाया है. महिला जज के पिता का कहना है कि उनकी बेटी की हत्या हुई है. मिली जानकारी के मुताबिक, पिता ने तहरीर देकर सदर कोतवाली में हत्या का केस दर्ज करवाया है. इसी के साथ अब पुलिस की नजर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर है. महिला जज के शव का पोस्टमॉर्टम रविवार के दिन किया जाएगा. अब देखना ये है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या सामने आता है.