लखनऊ। गंगा घाटी की ओसीपी संस्कृति से जुड़े लगभग 4500 से 4000 वर्ष पुराने सोने के सिक्कों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। ये सिक्के मुजफ्फरनगर जनपद के मांडी गांव से पाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें से लगभग 3000 सिक्के State Museum (स्टेट म्यूजियम), लखनऊ में रखे गए हैं। इनके सूक्ष्म अध्ययन के बाद सिक्कों का वजन 0.04 ग्राम से लेकर 1.61 ग्राम तक पाया गया है। इन सिक्कों को प्राचीन काल की धातु ढलाई और तौल व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्राचीन सिक्कों के अध्ययन से सामने आई जानकारी:
बताया गया कि प्राचीन काल से ही भारत में वस्तुओं की तौल के लिए रत्ती और तोला जैसी इकाइयों का प्रयोग किया जाता रहा है। सोने के जिन सिक्कों का वजन एक रत्ती से भी कम होता था, उनके वजन का आकलन राई और सरसों के बीज के माध्यम से किया जाता था। मांडी से मिले सिक्कों के अध्ययन में उनके अलग-अलग वजन सामने आने की बात कही गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन सिक्कों से उस समय के लोगों की धातुओं को ढालने की क्षमता का भी संकेत मिलता है। बताया गया कि वे तांबे की बड़ी तलवारों से लेकर सोने के छोटे सिक्कों तक को ढालने में सक्षम थे। सिक्कों के ढांचे के लिए चपटे, गोल और चौकोर आकार के आवरण तैयार करने में गणितीय ज्ञान की आवश्यकता होती थी। इसी आधार पर उस समय के लोगों को गणित की जानकारी होने और पाई (π) के ज्ञान से परिचित होने का संकेत मिलने की बात कही गई है।
व्यापार में सोने और तांबे के सिक्कों का प्रयोग:
जानकारी के अनुसार उस काल में व्यापार के लिए सोने और तांबे के सिक्कों का इस्तेमाल किया जाता था। इन सिक्कों का आकार छल्ले जैसा बताया गया है। उस समय द्विआधारी और दशमलव, दोनों संख्या प्रणालियों के प्रयोग की बात भी सामने रखी गई है।
तौल व्यवस्था को लेकर बताया गया कि ओसीपी संस्कृति के लोग 96 रत्ती के तोले का प्रयोग करते थे, जबकि हड़प्पा संस्कृति में 112 रत्ती के तोले के इस्तेमाल की बात कही गई है। इसी तरह व्यापार में वजन तौलने के लिए 112 रत्ती के तोले का प्रयोग Bahrain (बहरीन) में भी किए जाने की जानकारी दी गई। इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित तौल व्यवस्था के बीच समानताओं की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।
प्राचीन संस्कृतियों के बीच संबंधों का संकेत:
जानकारी में यह भी बताया गया कि प्राचीन काल में Bahrain (बहरीन) के लोग सिंध और बलूचिस्तान की आमरी, नाज और कुल्ली संस्कृतियों में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों जैसे बर्तनों का प्रयोग करते थे। इससे तत्कालीन संस्कृतियों के बीच संपर्क और समानताओं के संकेत मिलने की बात कही गई है।
मांडी से Madagascar (मेडागास्कर) और Indonesia (इंडोनेशिया) में पाए जाने वाले जैस्पर पत्थर के मनके भी मिलने की जानकारी दी गई है। इन मनकों को लेकर यह संकेत बताया गया कि दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों के भारत के साथ व्यापारिक संबंध रहे होंगे। जानकारी में यह संभावना भी व्यक्त की गई कि उस समय के लोग America (अमेरिका) के पश्चिमी तट तक यात्रा करते रहे होंगे।
पत्रकार वार्ता में साझा की गई जानकारी:
इन सभी जानकारियों को लेकर लखनऊ में आयोजित पत्रकार वार्ता में Vijay Kumar (विजय कुमार), पूर्व डीजीपी, उत्तर प्रदेश पुलिस, चेयरमैन, National Trust for Promotion of Knowledge (नेशनल ट्रस्ट फॉर प्रमोशन ऑफ नॉलेज) एवं चीफ एडिटर Indian Journal of Archaeology (इंडियन जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजी) ने जानकारी दी।
पत्रकार वार्ता में Ramprakash Verma (रामप्रकाश वर्मा), Devendra Pratap Singh (देवेंद्र प्रताप सिंह) आदि भी मौजूद रहे। पत्रकार वार्ता में मांडी से मिले प्राचीन सोने के सिक्कों, उनकी तौल, धातु ढलाई, प्राचीन व्यापार व्यवस्था और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संभावित संबंधों से जुड़ी जानकारी सामने रखी गई।
दक्षिण-पूर्वी एशिया से जुड़े संकेत:
जानकारी के अनुसार मांडी से मिले जैस्पर के मनकों को दक्षिण-पूर्वी एशिया से जुड़े संभावित व्यापारिक संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया गया। इस संबंध में Madagascar (मेडागास्कर) और Easter Island (ईस्टर आइलैंड) में दक्षिण-पूर्वी एशिया के लोगों के डीएनए पाए जाने की बात भी पत्रकार वार्ता में कही गई। इसी आधार पर प्राचीन काल में लोगों की संभावित यात्राओं और व्यापारिक संपर्कों को लेकर जानकारी साझा की गई।
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