Video: लखनऊ अग्निकांड- 2 बहनें जिंदा जलीं, 250 परिवार बेघर:राख में मिलीं फ्रिज, बाइक; महिलाएं बोलीं- कोठीवालों ने झोपड़ियां फूंकीं

राजधानी Lucknow (लखनऊ) के विकासनगर (Vikasnagar) क्षेत्र में बुधवार शाम लगी भीषण आग ने कुछ ही घंटों में सैकड़ों परिवारों को तबाह कर दिया। इस हादसे में 250 से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गईं, जबकि दो मासूम बहनों की दर्दनाक मौत हो गई। इनमें एक बच्ची की उम्र करीब 2 साल और दूसरी की महज 2 महीने बताई जा रही है। गुरुवार सुबह जब हालात कुछ शांत हुए, तो घटनास्थल पर हर तरफ राख, जले हुए सामान और बर्बादी का मंजर नजर आया। बेघर हुए लोग अपने जीवन की बची-खुची चीजें राख में तलाशते दिखाई दिए।

घटनास्थल पर दर्द और बेबसी का मंजर:
सुबह के समय घटनास्थल पर हर ओर तबाही के निशान थे। घरों में इस्तेमाल होने वाली अलमारी, फ्रिज और बाइक जैसी चीजें भी पूरी तरह जल चुकी थीं। लोग अपने जीवन की जमा पूंजी को राख में खोजने की कोशिश करते नजर आए। कई परिवारों के सामने अब रहने और खाने की समस्या खड़ी हो गई है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

रात खुले आसमान के नीचे गुजरी:
घटना के बाद प्रशासन ने कुछ प्रभावित परिवारों को रैन बसेरों में भेजा, लेकिन बड़ी संख्या में लोग पास के खाली प्लॉट में ही रात बिताने को मजबूर रहे। छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ खुले में रात बिताना उनके लिए बेहद कठिन साबित हुआ। कई परिवारों के पास अब बुनियादी जरूरतों का भी अभाव है।

महिलाओं के आरोप और बढ़ती आशंका:
कुछ महिलाओं ने रोते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय कोठी मालिकों ने उनकी झोपड़ियों में आग लगाई। उनका कहना है कि पहले उन्हें झुग्गियां खाली करने के लिए धमकाया गया था और चेतावनी दी गई थी कि नहीं हटने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे घटना को लेकर आशंका और बढ़ गई है।

प्रशासन की सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था:
विकासनगर क्षेत्र में स्थिति को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। संभावित तनाव को ध्यान में रखते हुए जवान हेलमेट और डंडों के साथ इलाके में तैनात हैं। प्रशासन के अधिकारी प्रभावित परिवारों की सूची तैयार कर रहे हैं, ताकि उन्हें राहत और मुआवजा दिया जा सके। हालांकि अब तक सहायता की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

आग की भयावहता और बचाव कार्य:
डीसीपी पूर्वी Deeksha Sharma (दीक्षा शर्मा) के अनुसार, आग की सूचना मिलते ही जिले के सभी फायर स्टेशनों से दमकल की गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया था। SDRF (एसडीआरएफ) और NDRF (एनडीआरएफ) की टीमों को भी तैनात किया गया। इस घटना में दो बच्चियों के शव बरामद हुए हैं, जिनके माता-पिता Barabanki (बाराबंकी) के Kashipurwa (काशी पुरवा) गांव के रहने वाले बताए गए हैं।

सिलेंडर धमाकों से बढ़ी तबाही:
बताया जा रहा है कि आग लगने के दौरान करीब 30 से अधिक गैस सिलेंडर फट गए, जिससे आग और तेजी से फैल गई। धुएं का गुबार करीब 10 किलोमीटर दूर तक देखा गया। आग की तीव्रता को देखते हुए आसपास के करीब 20 मकानों को एहतियातन खाली कराया गया और इलाके की बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई थी।

नेताओं की प्रतिक्रिया और हालात का जायजा:
इस घटना के बाद Lucknow (लखनऊ) से सांसद और रक्षा मंत्री Rajnath Singh (राजनाथ सिंह) ने जिलाधिकारी Vishakh G (विशाख जी) से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली। वहीं Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) के डिप्टी सीएम Brajesh Pathak (ब्रजेश पाठक) ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और राहत कार्यों की समीक्षा की।

निष्कर्ष: पुनर्वास सबसे बड़ी चुनौती:
इस अग्निकांड ने सैकड़ों परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों के पुनर्वास और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की है। साथ ही घटना के कारणों की जांच भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

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