पंचायतीराज विभाग : एक और आईएएस अफसर पर लगे गड़बड़ी करने के आरोप!

Lucknow। उत्तर प्रदेश का पंचायतीराज विभाग इन दिनों सुर्खियों में है। विभाग में मीडिया एजेंसी के टेंडर आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा विवाद विभाग के निदेशक और आईएएस अफसर अमित कुमार सिंह से जुड़ा है, जिन पर नियमों को दरकिनार कर एक विशेष कंपनी को फायदा पहुँचाने का आरोप लगा है।

यह आरोप किसी विपक्षी दल से नहीं बल्कि सीधे पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीयूष मिश्रा ने लगाया है। मिश्रा ने इस मामले में मंत्री को एक लिखित शिकायती पत्र सौंपा है। पत्र में दावा किया गया है कि निदेशक ने Rise and Wise Consultancy Pvt. Ltd. नामक फर्म को मनमाने तरीके से टेंडर आवंटित किया है।

A complaint letter addressed to the Panchayati Raj Minister from the Suheldev Bharatiya Samaj Party, discussing allegations of irregularities in media agency tender allocations.



शिकायत में लगाए गए आरोप

  • टेंडर (Bid No: GEM/2025/B/6237187) का आवंटन नियमों और पारदर्शिता को दरकिनार कर किया गया।
  • निदेशक ने अपनी “संरक्षण प्राप्त” कंपनी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से टेंडर प्रक्रिया प्रभावित की।
  • इस निर्णय से न केवल अन्य एजेंसियों के साथ भेदभाव हुआ बल्कि योजनाओं की जानकारी जनता तक सही तरीके से नहीं पहुँच पा रही।
  • विभागीय प्रचार-प्रसार प्रभावित होने से ग्रामीण विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।


मंत्री का रुख

जानकारी के अनुसार मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया है और जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पंचायतीराज विभाग जनता और गाँवों के विकास के लिए है, न कि अफसरों के निजी हित साधने का माध्यम। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर जांच में आरोप सही पाए गए तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि आरोप लगाने वाले स्वयं मंत्री की पार्टी के प्रवक्ता हैं। ऐसे में विभाग के भीतर ही मंत्री और निदेशक के बीच अप्रत्यक्ष टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। यह प्रकरण नौकरशाही और जनप्रतिनिधियों के रिश्तों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर रहा है।

आगे की राह

शिकायत में मांग की गई है कि मौजूदा टेंडर को तत्काल निरस्त कर नई पारदर्शी प्रक्रिया शुरू की जाए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभागीय जांच किस नतीजे पर पहुँचती है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह केवल एक अधिकारी पर कार्रवाई का मामला नहीं होगा, बल्कि विभागीय प्रणाली और टेंडर प्रक्रिया की साख पर भी बड़ा असर डालेगा।

पंचायतीराज विभाग में लगे इन आरोपों ने सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है। जनता और विपक्ष की नजरें इस समय सीधे मंत्री और सरकार की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।

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