रिपोर्ट: सऊद अंसारी
Lucknow: लखनऊ में विजयादशमी के अवसर पर शहरभर में रावण दहन का भव्य आयोजन हुआ। ऐशबाग और सदर के अलावा शहर की कुल 117 जगहों पर पुतले जलाए गए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के नारे लगाकर उत्सव को और भव्य बनाया। रावण दहन का यह उत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा।
ऐशबाग में उत्सव का भव्य रूप:
ऐशबाग रामलीला मैदान में 65 फीट ऊँचा रावण पुतला जलाया गया। लगभग 12 हजार लोग इस आयोजन में शामिल हुए और उत्सव की भव्यता का अनुभव किया। डेढ़ घंटे तक चली आतिशबाजी ने माहौल को और भी उत्सवपूर्ण बना दिया। लोग पुतले की तस्वीरें और वीडियो बनाकर इस ऐतिहासिक पल को यादगार बना रहे थे।
सदर क्षेत्र में रावण दहन:
सदर क्षेत्र में 80 फीट ऊँचा रावण पुतला जलाया गया। लगभग 10 हजार लोग इस आयोजन का हिस्सा बने। पुतले के जलने के साथ ही जय श्रीराम के नारे गूंजने लगे। लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ इस धार्मिक परंपरा में शामिल हुए।
सांसद और धर्मगुरु का संदेश:
ऐशबाग में सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि रामलीला का आयोजन गोस्वामी तुलसीदास ने शुरू किया था और नवाबों ने इसे बनाए रखने में योगदान दिया। महामंडलेश्वर यतिंद्र नाथ गिरी महाराज ने सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएं दी और धर्म, सदाचार तथा संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला।
आरएसएस का पथ संचलन:
विजयादशमी पर आरएसएस कार्यकर्ताओं ने पथ संचलन निकाला। इसमें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक संघ की वेशभूषा में शामिल हुए। पथ संचलन ने उत्सव की गरिमा और भव्यता को बढ़ाया।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी:
शहर की 117 जगहों पर आयोजित रावण दहन कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए। ड्रोन निगरानी के अलावा सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी भी तैनात रहे। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया गया कि आयोजन शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो।
उत्सव में भागीदारी और श्रद्धा:
पूरे शहर में हजारों लोग इस अवसर पर जुटे। लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ आए और पुतलों के जलने के दृश्य को कैद करने के लिए मोबाइल कैमरों का इस्तेमाल किया। बच्चों और युवाओं में उत्साह चरम पर था। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि लोगों में सांस्कृतिक चेतना और परंपरा के प्रति सम्मान की भावना को भी बढ़ावा देने वाला साबित हुआ।
भव्य आतिशबाजी और समापन:
ऐशबाग और अन्य प्रमुख स्थानों पर हुई आतिशबाजी ने कार्यक्रम को और भव्य बना दिया। लोगों ने रातभर उत्सव का आनंद लिया और विजयादशमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया। इस भव्य आयोजन ने शहरवासियों में उत्सव की भावना और सांस्कृतिक एकता को और मजबूत किया।