लखनऊ के हैदरगंज पुल पर एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाली खतरनाक डोर की चपेट में आने से एक युवक की गर्दन गंभीर रूप से कट गई। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। घायल युवक को तत्काल इलाज के लिए ट्रामा सेंटर ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।
पतंग की डोर बनी जान का दुश्मन:
जानकारी के अनुसार, यह हादसा लखनऊ (Lucknow) के हैदरगंज पुल पर हुआ। युवक बाइक से पुल से गुजर रहा था, तभी अचानक पतंग की डोर उसकी गर्दन में फंस गई। डोर इतनी तेज और खतरनाक थी कि गर्दन गहराई तक कट गई। कुछ ही पलों में युवक लहूलुहान होकर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
ट्रामा सेंटर में चला इलाज:
घायल अवस्था में युवक को लखनऊ (Lucknow) स्थित ट्रामा सेंटर (Trauma Center) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोट के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अस्पताल से मौत की सूचना मिलते ही परिजन बेसुध हो गए।
मृतक की पहचान शोएब के रूप में:
मृतक की पहचान शोएब के रूप में हुई है। बताया गया कि शोएब अपने परिवार का इकलौता बेटा था और मेहनत-मजदूरी कर घर का खर्च चलाता था। उसकी अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और घर में मातम पसरा हुआ है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़:
शोएब की मौत के बाद उसका परिवार सदमे में है। घर की आर्थिक जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। अब उसके न रहने से परिवार के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है। पड़ोसी और रिश्तेदार परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं, लेकिन इस दर्दनाक क्षति की भरपाई संभव नहीं है।
इलाके में गुस्सा और आक्रोश:
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाला खतरनाक मांझा लगातार जानलेवा साबित हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद इस पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। हैदरगंज पुल जैसे व्यस्त इलाकों में इस तरह की घटनाएं आम लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं।
खतरनाक मांझे पर प्रतिबंध की मांग:
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि खतरनाक मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया जाए। लोगों का कहना है कि हर साल इस तरह की डोर से कई लोग घायल होते हैं और कुछ की जान तक चली जाती है। इसके बावजूद लापरवाही बरती जा रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
पतंग की डोर से बढ़ता खतरा:
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि पतंग की डोर, खासकर धारदार और सिंथेटिक मांझा, आम लोगों के लिए जानलेवा बन चुका है। सड़क पर चलने वाले राहगीर, दोपहिया वाहन चालक और यहां तक कि बच्चे भी इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। समय रहते सख्त कदम न उठाए गए तो ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी।
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