लखनऊ के जुनैद से 27 लाख की ठगी करने वालों पर कानपुर पुलिस क्यों है मेहरबान?

लखनऊ (Lucknow) के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र निवासी जुनैद चांद ने कानपुर (Kanpur) के जाजमऊ थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जुनैद का आरोप है कि उसके करीबी दोस्त मोहम्मद शमशाद और मोहम्मद नौशाद ने षड्यंत्र के तहत उससे करीब 27 लाख रुपये लिए और रकम वापस मांगने पर उसके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज करा दिया। पीड़ित का यह भी आरोप है कि मुकदमे में समझौते के नाम पर उससे एक करोड़ रुपये की मांग की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जुनैद चांद के मुताबिक वह वी-युग मेटा वर्स में एक्सआर तकनीक से जुड़े काम करते हैं। उनका कहना है कि जून 2023 में उनके करीबी दोस्त मोहम्मद नौशाद ने घर की अलग-अलग समस्याएं बताकर अपने भाई और परिवार के सदस्यों के लिए उनसे रकम ली। जुनैद का दावा है कि इस तरह उनसे करीब 27 लाख रुपये से अधिक की रकम ली गई। जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो कथित तौर पर उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा।

रकम वापस मांगने पर मुकदमा दर्ज कराने का आरोप:

जुनैद चांद का आरोप है कि रकम वापस न करनी पड़े, इसके लिए मोहम्मद नौशाद ने कानपुर के जाजमऊ थाने में उनके और उनके परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि इस मुकदमे में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। जुनैद के अनुसार, मुकदमे की कार्रवाई की धमकी देते हुए समझौते की बात कही गई और इसके लिए एक करोड़ रुपये की मांग रखी गई।

जुनैद ने कथित तौर पर रकम देने के बजाय न्यायालय का रुख किया और पूरे मामले से संबंधित अपनी बात न्यायालय के समक्ष रखी। इसके बाद कानपुर की सीजेएम अदालत की ओर से जाजमऊ थाने को मामले से जुड़े साक्ष्यों के साथ अदालत में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किए गए।

तीन नोटिस के बाद भी साक्ष्य पेश न करने का दावा:

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अर्श आलम के अनुसार, जुनैद के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर साक्ष्यों के साथ सीजेएम अदालत का रुख किया गया। अधिवक्ता का दावा है कि जाजमऊ थाने में दर्ज एफआईआर में विपक्षी पक्ष की ओर से बिना साक्ष्य के आरोप लगाए गए हैं।

अधिवक्ता के मुताबिक सीजेएम प्रदीप शुक्ल ने जाजमऊ थाने को 6 अगस्त 2026, 20 अगस्त 2026 और 5 सितंबर 2026 को नोटिस जारी करते हुए दर्ज मुकदमे से संबंधित साक्ष्य न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि तीन नोटिस जारी होने के बावजूद पुलिस की ओर से अब तक न्यायालय में कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया है। इसी आधार पर पीड़ित पक्ष पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है।

धमकी भरे फोन आने का भी लगाया आरोप:

जुनैद चांद का आरोप है कि मोहम्मद शमशाद अलग-अलग नंबरों से कथित तौर पर असामाजिक तत्वों के माध्यम से उसे फोन करवा रहा है। पीड़ित के अनुसार, इन फोन कॉल के दौरान उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी देने के साथ गाली-गलौज की जाती है।

जुनैद का दावा है कि फोन करने वाले लोग कथित तौर पर एक करोड़ रुपये देने की मांग करते हैं और रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देते हैं। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि जाजमऊ थाने में तैनात एसआई देवेश मोहन और एसआई प्रदीप पांडेय उसके करीबियों को फोन कर उसके और उसके परिवार के खिलाफ कथित तौर पर झूठी गवाही देने का दबाव बना रहे हैं। जुनैद का कहना है कि इस संबंध में ऑडियो भी उसके पास मौजूद है।

न्यायालय की कार्रवाई के बाद उठे सवाल:

पूरे मामले में पीड़ित पक्ष का कहना है कि उसने न्यायालय के समक्ष अपनी शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों को रखा है। सीजेएम अदालत की ओर से जाजमऊ थाने को अलग-अलग तारीखों में नोटिस जारी किए जाने और साक्ष्य पेश करने के निर्देश दिए जाने का हवाला देते हुए पीड़ित पक्ष पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है।

अब इस मामले में आगे न्यायालय के समक्ष क्या तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत होते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल जुनैद चांद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताते हुए न्यायालय के माध्यम से अपना पक्ष रखा है और कथित ठगी, धमकी तथा मुकदमे से जुड़े मामले में न्याय की मांग की है।

#Tag: #JunaidFraudCase

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रिपोर्ट : सऊद अंसारी
ब्यूरो: हसीन अंसारी

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