लखनऊ में बाढ़… बैकुंठ धाम में अंतिम संस्कार का संकट:एक चबूतरा बचा, पानी बढ़ा तो सड़क पर करना पड़ेगा दाह संस्कार
लखनऊ में बाढ़ के हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। गोमती नदी का जलस्तर नौवें दिन भी बढ़ रहा है, जिससे शहर के कई इलाकों में पानी का संकट गहरा गया है। फैजुल्लागंज सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में बताया जा रहा है। यहां करीब 40 हजार घरों में पांच से छह फीट तक पानी भरने की बात सामने आई है। इससे तीन लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने का दावा किया गया है। कई परिवार अपने घरों में ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
फैजुल्लागंज में घरों तक पहुंचा पानी:
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर फैजुल्लागंज में दिखाई दे रहा है। यहां बड़ी संख्या में घर पानी से घिर गए हैं और कई मकानों के भीतर पांच से छह फीट तक पानी भर गया है। जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों के सामने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की स्थिति पैदा हो गई है।
कई परिवार अपने घरों में ताला लगाकर दूसरी जगहों पर चले गए हैं। लगातार बढ़ते पानी के कारण प्रभावित लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है।
बैकुंठ धाम भी पूरी तरह जलमग्न:
बाढ़ का असर अंतिम संस्कार स्थल बैकुंठ धाम पर भी पड़ा है। पूरा परिसर पानी में डूब गया है और शव रखने के लिए बनाए गए चबूतरे भी जलमग्न हो गए हैं। यहां पूजा कराने वाले शनि के मुताबिक, पिछले दिन से पानी तेजी से बढ़ा है।
शनि ने बताया कि जहां एक साथ 15 से 20 शवों का अंतिम संस्कार किया जाता था, वह पूरा इलाका पानी में डूब गया है। अब केवल एक चबूतरा बचा है, जहां करीब 20 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
गुलाला घाट से शव आना भी प्रभावित:
शनि के अनुसार, गुलाला घाट से भी शव नहीं आ रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो अगले दिन से सड़क पर ही अंतिम संस्कार करने की स्थिति बन सकती है।
बाढ़ के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। पानी बढ़ने के साथ उपलब्ध स्थान कम होता जा रहा है, जिससे लोगों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है।
इटौंजा में छह दोस्त बाढ़ के बहाव में बहे:
इटौंजा में बाढ़ के तेज बहाव में छह दोस्तों के बह जाने की घटना सामने आई है। इनमें से एक की मौत हो गई, जबकि पांच लोगों को बचा लिया गया। तेज बहाव के बीच हुई इस घटना ने बाढ़ की स्थिति की गंभीरता को और सामने ला दिया है।
मंदिरों में भी घुसा पानी, गर्भगृह बंद:
बाढ़ का असर धार्मिक स्थलों पर भी पड़ा है। खाटू श्याम मंदिर, हनुमंत धाम और चंद्रिका देवी मंदिर पानी से घिर गए हैं। लेटे हनुमान मंदिर के गर्भगृह में करीब 13 फीट तक पानी भर गया है।
करीब 20 वर्षों के बाद ऐसी स्थिति बनी है कि लेटे हनुमान मंदिर का गर्भगृह बंद करना पड़ा है। वहीं चंद्रिका देवी मंदिर को भी पानी कम होने तक बंद कर दिया गया है।
गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण लखनऊ में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। फैजुल्लागंज से लेकर धार्मिक स्थलों और अंतिम संस्कार स्थल तक पानी पहुंचने से जनजीवन प्रभावित हुआ है।
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