लखनऊ (Lucknow) के अलीगंज (Aliganj) सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या-102 में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड की जांच में लगातार नई जानकारियां सामने आ रही हैं। एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि जिस स्थान पर भवन में आपातकालीन स्थिति के दौरान लोगों की सुरक्षित निकासी के लिए फायर एग्जिट और लोहे की सीढ़ियां बनाई जानी चाहिए थीं, वहां लिफ्ट स्थापित कर दी गई थी। जांच एजेंसी का मानना है कि यदि भवन में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो हादसे में कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
फायर एग्जिट की जगह लगा दी गई लिफ्ट:
जांच में सामने आया है कि भवन के पिछले हिस्से में जहां आपातकालीन निकासी के लिए फायर एग्जिट और लोहे की सीढ़ियों का निर्माण होना चाहिए था, वहां लिफ्ट लगा दी गई थी। इतना ही नहीं, भवन के सामने वाले हिस्से में भी एक और लिफ्ट लगाने की तैयारी चल रही थी। एसआईटी (SIT) के अनुसार यह व्यवस्था भवन निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के विपरीत थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि वहां नियमानुसार सीढ़ियां होतीं तो आग लगने के बाद कई लोग सुरक्षित बाहर निकल सकते थे और हादसे में हुई 15 लोगों की मौत टाली जा सकती थी।
धुएं के कारण बाधित हुई निकासी:
प्रारंभिक जांच के अनुसार आग लगने के बाद पूरे भवन में तेजी से धुआं भर गया। ऐसी स्थिति में सुरक्षा कारणों से लिफ्ट स्वतः बंद हो जाती है और उसका उपयोग भी नहीं किया जाता। जिस स्थान से लोगों को सीढ़ियों के माध्यम से बाहर निकलना चाहिए था, वहां लिफ्ट होने के कारण निकासी प्रभावित हो गई। इससे भवन में फंसे लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका और वे धुएं तथा आग की चपेट में आ गए।
भवन निर्माण नियमों की अनदेखी आई सामने:
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बहुमंजिला भवन में आग लगने की स्थिति में लिफ्ट का उपयोग नहीं किया जाता, क्योंकि बिजली आपूर्ति बाधित होने या धुआं भरने से लिफ्ट बीच में रुक सकती है। इसी वजह से भवन निर्माण नियमों में फायर एग्जिट के लिए सुरक्षित सीढ़ियों की व्यवस्था अनिवार्य मानी जाती है। जांच में यह भी सामने आया है कि भवन में आपातकालीन निकासी के लिए वैकल्पिक सीढ़ियों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।
बिजली के अधिक भार से बढ़ी आग की तीव्रता:
एसआईटी (SIT) की जांच में यह भी सामने आया है कि भवन में 20 किलोवाट के स्वीकृत बिजली कनेक्शन के मुकाबले 34.18 किलोवाट तक का लोड इस्तेमाल किया जा रहा था। शुरुआती जांच में माना गया है कि अधिक विद्युत भार के कारण शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसके बाद आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया। जांच अधिकारियों के अनुसार यदि निर्धारित क्षमता के अनुरूप बिजली का उपयोग किया जाता और समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट कराया जाता तो इस तरह की दुर्घटना की संभावना कम हो सकती थी।
एलडीए जांच में भी मिलीं कई अनियमितताएं:
लखनऊ विकास प्राधिकरण (Lucknow Development Authority-LDA) की जांच में भी भवन निर्माण से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। जांच के अनुसार वर्ष 2016 के आसपास बने इस भवन में स्वीकृत मानचित्र का पालन नहीं किया गया। निर्धारित सेटबैक क्षेत्र में निर्माण किया गया, एक अतिरिक्त मंजिल बनाई गई और भवन निर्माण संबंधी कई नियमों की अनदेखी की गई। इन्हीं आधारों पर एलडीए (LDA) ने निर्माणकर्ताओं पर लगभग 91.25 लाख रुपये का दंड और 50 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया है।
18 इंजीनियरों की भूमिका भी जांच के दायरे में:
अग्निकांड के बाद एलडीए (LDA) ने भवन से जुड़े 18 इंजीनियरों की सूची शासन और एसआईटी (SIT) को उपलब्ध कराई है। इनमें 12 इंजीनियर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि पांच तत्कालीन जोनल अधिकारियों और संबंधित पीसीएस (PCS) अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि सूची में शामिल दो इंजीनियरों ने दावा किया है कि वे संबंधित क्षेत्र में कभी तैनात नहीं रहे और उन्होंने सूची में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति भी दर्ज कराई है। अब जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि नियमों के उल्लंघन के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
बिजली विभाग की भूमिका पर भी सवाल:
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि भवन के नाम पर वर्ष 2000 में 20 किलोवाट का बिजली कनेक्शन स्वीकृत किया गया था। उस समय विद्युत सुरक्षा निदेशालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया गया था, लेकिन बाद में उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया। अब यह भी जांच का विषय है कि आवासीय भवन में व्यावसायिक गतिविधियां कैसे संचालित होती रहीं, बिजली का भार स्वीकृत सीमा से अधिक कैसे पहुंच गया और संबंधित विभागों ने समय रहते इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की।
जिम्मेदारों की भूमिका पर केंद्रित जांच:
एसआईटी (SIT) की जांच अब केवल आग लगने के कारणों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी विभागों और अधिकारियों की भूमिका भी जांची जा रही है जिनकी जिम्मेदारी भवन निर्माण, अग्नि सुरक्षा और बिजली व्यवस्था की निगरानी करना था। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि फायर एग्जिट की जगह लिफ्ट लगाया जाना, भवन निर्माण नियमों की अनदेखी और बिजली का अत्यधिक भार इस हादसे के प्रमुख कारणों में शामिल रहे।
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