लोन लेने वाले सावधान! अब जेल में बकायेदार…

रिपोर्टर: हसीन अंसारी

ग़ाज़ीपुर। बदलते जमाने में ज्यादातर लोग ऐसे हैं जिनकी इच्छाएं ईएमआई से पूरी हो रही है। पहले किसी सामान को खरीदने के लिए नकद पैसों की आवश्यकता होती थी। जब क्षमता होती थी तभी लोग कोई सामान खरीदते थे। बदलते वक्त के साथ फाइनेंस कंपनी और बैंकों की संख्या बढ़ती गई और हर सामान लोन पर मिलने लगा। चाहे रोजगार करने के लिए दुकान खोलना हो, शोरूम खोलना हो, खेती करने के लिए ट्रैक्टर खरीदना हो, अच्छा मोबाइल रखने का शौक हो, दोपहिया वाहन खरीदना हो, चार पहिया वाहन खरीदना हो, घर बनवाना हो या कोई भी छोटा मोटा सामान खरीदना हो अब लोन पर सब मिल जाता है। अब मिडिल क्लास और गरीब आदमी पैसों की तंगी की वजह से कभी अपना विकास नहीं कर पाता था तो उसने लोन का रास्ता अपनाया। लेकिन शायद वह लोन के नियम कानून को समझ नहीं पाया।

नतीजन लोन लेने के बाद बहुत सारे मामले ऐसे आते हैं जिसमें लोन लेने वाला व्यक्ति लोन चुका नहीं पाता। प्राइवेट फाइनेंस कंपनी या बैंक इसका फायदा भी उठाते हैं और तरह तरह के चार्जेस लगाकर देनदार को प्रताड़ित करने का मौका नहीं छोड़ते। रिकवरी एजेंट कई हथकंडे अपनाने हैं। जिसपर सुप्रीम कोर्ट के कई गाइडलाइंस हैं।

दरअसल लोन बैंक का रिस्क है, कस्टमर का नही। लोन देने से पहले बैंक या फाइनेंस कंपनी को विचार करना होगा कि वो जबरन लोन की रकम नहीं वसूल सकती। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि रिकवरी एजेंट दवाब बनाकर या बदसलूकी करकर लोन नहीं वसूल सकता।

यही हाल सरकारी बैंकों के साथ भी है। लेकिन सवाल ये है कि लोन की रिकवरी हो कैसे? इसके लिए भी कई नियम हैं। अब यूपी के जनपद गाजीपुर में प्रशासन एक्शन मोड में नजर आ रही है।

हमारे संवादाता हसीन अंसारी का कहना है कि जनपद में बकायेदारों के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में तहसील प्रशासन ने दो बकायेदारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। सदर तहसील क्षेत्र के करण्डा, भड़सर इलाके से बकायेदारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।गिरफ्तार बकायेदारों में से एक ने ट्रैक्टर खरीदने जबकि दूसरे ने व्यापार के लिए बैंक से लोन लिया था,लेकिन चुकता नही करने पर दोनो के खिलाफ आरसी जारी की गई थी। बकायेदारों के बकाया राशि जमा न करने पर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

अब जेल में कैसे लोन की रकम चुकता की जाएगी, इसका भी कोई नियम होगा ही?

जनता को जागरूक होने की जरूरत है। लोन सोच समझ कर लें, उसके नियम कानून को पहले समझ लें फिर कर्ज का रास्ता चुने। ये याद रखें पेट चार रोटी में ही भर जाना है और अंतिम यात्रा भी चार कंधों पर ही करनी है। न कुछ लेकर इस धरती पर जन्म हुआ है और न कुछ लेकर जाना है। अतः अपने इक्षाओं को संतुलित कर संघर्षों का रास्ता अपनाएं। याद रहे हमारे देश में टैक्स से इतना राजस्व आ जाता है कि गरीबी दूर हो सकती है।

अब वोट भी तो जनता ही देती है। तो फिर विचार कीजिए…

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