लखनऊ मेट्रो से सफर कर रहे तो हो जाएं सावधान, यात्रियों के लिए जान का खतरा!

लखनऊ [Lucknow] मेट्रो में रेल पटरियों की मजबूती और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) [Comptroller and Auditor General of India] की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मेट्रो कॉरपोरेशन ने गति प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के बिना ही मेट्रो संचालन जारी रखा। इसी के साथ गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) [Ghaziabad Development Authority] के विकास कार्य और गरीबों को भूखंड आवंटन में भी कई अनियमितताएं सामने आई हैं।

कमजोर पटरियों का खुलासा: CAG रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी कानपुर [IIT Kanpur] ने लखनऊ मेट्रो की रेल पटरियों की जांच की। इसमें पाया गया कि डिपो में पटरियों की कठोरता 229 से 242 बीएचएन (ब्रिनेल कठोरता संख्या) थी, जबकि मुख्य लाइन पर 291 से 308 बीएचएन के बीच थी। भारतीय रेलवे [Indian Railways] के मानकों के अनुसार यह अपेक्षित स्तर से कम है। रिपोर्ट में कहा गया कि कमजोर पटरियों से ट्रेन के पहिए जल्दी घिस सकते हैं और भविष्य में मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च आएगा।

अत्यधिक शोर स्तर: आईआईटी कानपुर ने मेट्रो में शोर का स्तर भी मापा। मुंशीपुलिया [Munshipulia] स्टेशन पर खड़ी मेट्रो के अंदर शोर 76 डेसिबल था, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक 65 डेसिबल है। मेट्रो के चलते समय मुंशीपुलिया से केडी सिंह बाबू स्टेडियम [KD Singh Babu Stadium] के बीच शोर 83 डेसिबल तक पहुंच गया, जबकि मानक 75 डेसिबल है। रिपोर्ट में कहा गया कि खड़ी या चलती मेट्रो दोनों ही स्थितियों में शोर मानक से अधिक है, जो यात्रियों के लिए असुविधाजनक और जोखिमपूर्ण हो सकता है।

गति प्रमाण पत्र का नवीनीकरण नहीं: CAG ने यह भी कहा कि लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने मार्च 2017 में जारी अंतरिम गति प्रमाण पत्र का नवीनीकरण नहीं कराया। यह प्रमाण पत्र यह सुनिश्चित करता है कि ट्रेन कितनी सुरक्षित गति से चल सकती है और उसके पहियों में कितनी टूट-फूट हो रही है। इसके नवीनीकरण में देरी या अनदेखी से यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हुआ।

महानगर स्टेशन को परियोजना से हटाना: लखनऊ मेट्रो फेज-1 परियोजना में 22.88 किलोमीटर की दूरी में कुल 22 स्टेशन बनाये जाने थे। डीपीआर [DPR] के अनुसार, महानगर स्टेशन [Mahanagar Station] को 2015 में तीसरा और 2020 में दूसरा स्थान देना था। लेकिन मेट्रो कॉरपोरेशन ने भारत सरकार की अनुमति के बिना महानगर स्टेशन को परियोजना से हटा दिया। इससे डीपीआर, एमओयू [MoU], वित्त अनुबंध और परियोजना समझौते का उल्लंघन हुआ।

अनियमितताओं का व्यापक प्रभाव: CAG रिपोर्ट ने यह भी इंगित किया कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के तहत गरीबों को भूखंड आवंटन और विकास कार्यों में अनियमितताएं हुई हैं। वित्तमंत्री सुरेश खन्ना [Suresh Khanna] ने बजट सत्र के अंतिम दिन विधानसभा में यह रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में 2017 से 2022 तक के कार्यकाल की कई गंभीर कमियों को उजागर किया गया।

यात्री सुरक्षा सर्वोपरि: विशेषज्ञों ने कहा कि कमजोर पटरियां, उच्च शोर स्तर और प्रमाण पत्र नवीनीकरण में देरी जैसी कमियां लखनऊ मेट्रो में सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। यात्रियों और कर्मचारियों के लिए इन मुद्दों का शीघ्र समाधान जरूरी है।

Disclaimer: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com



#lucknow #metro #cag #report #rail #tracks #safety #issues

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading