Lakhimpur Kheri के निघासन कोतवाली क्षेत्र के चखरा गांव से एक मामला सामने आया है। जहां 14 साल का विक्रम पुत्र रामगोपाल, रोज की तरह घर से घास लेने गन्ने के खेत गया था। लेकिन कुछ देर बाद वहां से चीख-पुकार सुनाई दी।
वही आसपास काम कर रहे ग्रामीण दौड़कर पहुंचे तो देखा विक्रम खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। उसकी गर्दन बुरी तरह से कटी हुई थी। आनन-फानन में ग्रामीणों ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
यहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर भी सामने आई। करीब 20 मिनट तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा और जब एंबुलेंस आई… तो स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं था। पुलिसकर्मियों को खुद बच्चे को उठाकर ले जाना पड़ा।
घटना की जानकारी मिलते ही विक्रम के बीमार पिता सदमे में आकर बेहोश हो गए। उनका कहना है कि उन्हें नहीं पता बेटे की गर्दन किसने काटी। वहीं ग्रामीणों का दावा है कि घटनास्थल पर इंसानी पदचिन्ह मौजूद थी। जबकि जंगली जानवर के निशान नहीं मिले।
हालांकि, कोतवाल महेश चंद्र का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह जंगली जानवर का हमला प्रतीत होता है, क्योंकि विक्रम को काफी दूर तक घसीटा गया है। फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 14 साल के मासूम विक्रम की गर्दन आखिर किसने काटी… क्या ये जंगली जानवर का हमला है या किसी इंसानी साजिश का नतीजा?पुलिस की जांच से ही सच सामने आएगा।

