Lucknow (लखनऊ), Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के व्यवहार को लेकर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya (केशव प्रसाद मौर्य) ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने सदन की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न की और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान नहीं किया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में जो घटनाक्रम सामने आया, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं था और इसकी कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए।
सपा पर लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी का आरोप:
Keshav Prasad Maurya (केशव प्रसाद मौर्य) ने कहा कि Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) ऐसा राजनीतिक दल है, जिसका लोकतांत्रिक परंपरा और व्यवस्था से कभी कोई सरोकार नहीं रहा। उन्होंने कहा कि विधानसभा के अंदर जिस प्रकार का आचरण विपक्षी दल के सदस्यों द्वारा किया गया, वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था।
उन्होंने कहा कि सदन में विपक्ष का व्यवहार इस बात को दर्शाता है कि वह सकारात्मक चर्चा के बजाय कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न करने की कोशिश कर रहा था।
पीठ के अपमान का लगाया आरोप:
उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) के सदस्यों ने विधानसभा की पीठ का अपमान किया। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान अपनाया गया रवैया संसदीय परंपराओं के विपरीत था और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदन की मर्यादा और पीठ का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा सभी सदस्यों से इसकी अपेक्षा की जाती है।
मुख्यमंत्री को बात रखने नहीं देने का दावा:
Keshav Prasad Maurya (केशव प्रसाद मौर्य) ने कहा कि Yogi Adityanath (योगी आदित्यनाथ) प्रदेश की 25 करोड़ जनता के हित से जुड़े विषयों पर अपनी बात सदन में रखना चाहते थे, लेकिन विपक्ष ने उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के इस रवैये से यह स्पष्ट होता है कि वह सदन में रचनात्मक चर्चा के बजाय व्यवधान पैदा करना चाहता है। उनके अनुसार, इससे विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई।
जनहित से दूरी का लगाया आरोप:
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के व्यवहार से यह संदेश जाता है कि उसका उद्देश्य केवल सदन का समय बर्बाद करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) का प्रदेश की जनता के हितों से कोई सरोकार नहीं है और वह जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने के बजाय कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक विमर्श का सर्वोच्च मंच है और वहां जनहित से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, विपक्ष का रवैया इस उद्देश्य के अनुरूप नहीं दिखाई दिया।
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