कानपुर (Kanpur) में चर्चित लेम्बोर्गिनी कार हादसे ने बुधवार को अचानक नया रुख ले लिया। पहले कथित ड्राइवर मोहन ने अदालत में आत्मसमर्पण किया, वहीं इसके बाद मुकदमा दर्ज कराने वाले मो. तौसीफ ने समझौते की बात कही। घटनाक्रम ने पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। हादसे में छह लोग घायल हुए थे और घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसके आधार पर पुलिस जांच आगे बढ़ी।
कोर्ट में सरेंडर और समझौते की पहल:
बुधवार दोपहर कथित ड्राइवर मोहन ने अदालत पहुंचकर आत्मसमर्पण किया। उसने बयान दिया कि हादसे के समय वह ही कार चला रहा था। उसके अनुसार, शिवम मिश्रा को अचानक दौरा पड़ गया था, जिससे वह घबरा गया और नियंत्रण खो बैठा। इसी दौरान दुर्घटना हो गई। मोहन ने यह भी कहा कि जब कार का शीशा तोड़ा गया और दरवाजा खोला गया तो वह नीचे की ओर से निकल गया था, जबकि बाउंसर ने शिवम को बाहर निकाला। हादसे के बाद वह किनारे खड़ा रहा और शिवम को दूसरी गाड़ी से ले जाया गया।
इसी बीच, शिकायतकर्ता मो. तौसीफ अपने वकील के साथ अदालत पहुंचे और समझौते की बात कही। इस घटनाक्रम ने कानूनी प्रक्रिया को नया आयाम दे दिया है।
पुलिस जांच और एफआईआर में नाम:
रविवार को हुई इस घटना के बाद पुलिस कमिश्नर ने प्रारंभिक जांच के आधार पर दावा किया था कि लेम्बोर्गिनी तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के पुत्र शिवम मिश्रा वाहन चला रहे थे। इसके बाद शिवम का नाम एफआईआर में जोड़ा गया। मामले की जांच ग्वालटोली थाना (Gwaltoli Police Station) के दरोगा दिनेश कुमार द्वारा की जा रही है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में शिवम को आरोपी मानते हुए संबंधित साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए हैं। अब एसीजेएम-7 कोर्ट (ACJM-7 Court) द्वारा इस मामले में आदेश सुनाया जाना है।
कारोबारी पिता का दावा और विवाद:
मंगलवार को कारोबारी केके मिश्रा थाने पहुंचे और उन्होंने दावा किया कि हादसे के समय कार उनका पुत्र नहीं बल्कि ड्राइवर मोहन चला रहा था। उनके अनुसार, दुर्घटना के समय शिवम सो रहा था और हादसे के बाद कार लॉक हो जाने से उसकी तबीयत बिगड़ गई। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति सामान्य होने पर वे स्वयं बेटे को थाने लाएंगे।
जब पुलिस कमिश्नर के बयान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पुलिस का दावा गलत है। वहीं, कारोबारी के वकील ने अदालत में बताया कि शिवम अस्वस्थ है और दिल्ली में भर्ती है।
सीसीटीवी और वीडियो साक्ष्य:
पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अहम भूमिका निभा रहे हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि हादसे के बाद का वीडियो स्पष्ट संकेत देता है कि ड्राइविंग सीट से शिवम को निकाला गया। वीडियो में देखा गया कि पीछे चल रही कार से आए बाउंसरों ने ईंट से शीशा तोड़ा और दरवाजा खोलकर शिवम को बाहर निकाला। पुलिस का दावा है कि फुटेज में किसी अन्य ड्राइवर की मौजूदगी नजर नहीं आती।
जांच अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्य अदालत में पेश कर दिए गए हैं और अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
अदालती प्रक्रिया पर निगाहें:
पूरा मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर आगे की दिशा तय होगी। घटना के बाद से कानपुर में इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा है और लोग न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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