लखनऊ में आयोजित Dr. Ram Manohar Lohia National Law University के दीक्षांत समारोह में देश के होने वाले Chief Justice of India सूर्यकांत ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए आत्ममंथन और निरंतर सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वकालत में सफलता सिर्फ केस जीतने में नहीं, बल्कि न्याय दिलाने में है। अपने शुरुआती दिनों का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार ओवर-कॉन्फिडेंस के चलते वे एक प्रॉपर्टी विवाद का केस हार गए थे, और उसी दिन से उन्होंने हर केस का विवरण लिखने और आत्मविश्लेषण करने की आदत डाल ली।
असफलता ने सिखाया आत्ममंथन का मूल्य:
सूर्यकांत ने कहा कि अपने शुरुआती करियर के दौरान की गई एक गलती ने उन्हें जीवनभर का सबक दे दिया। लोकल कोर्ट में प्रैक्टिस के दौरान जब वे एक प्रॉपर्टी विवाद का केस ओवर-कॉन्फिडेंस में हार गए, तब से उन्होंने अपने पास एक नोटबुक रखना शुरू किया। वे हर केस की तैयारी, तर्क और परिणाम का बारीकी से अध्ययन करते हैं ताकि भविष्य में वही गलती दोहराई न जाए।
एडवोकेट जनरल के कार्यकाल से मिले अनुभव:
सूर्यकांत ने बताया कि राज्य में Advocate General (AG) के रूप में काम करते हुए उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। इस दौरान उन्होंने अपने कार्यों का नियमित सेल्फ एग्जामिनेशन किया। उन्होंने कहा कि एक अच्छे वकील के लिए जरूरी है कि वह खुद को निरंतर अपडेट रखे, क्योंकि कई उत्कृष्ट वकील सिर्फ खुद को अपग्रेड न करने के कारण आउटडेटेड हो गए।
छात्रों को दी आत्ममूल्यांकन की सीख:
सूर्यकांत ने लॉ छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि कानून के क्षेत्र में आत्ममूल्यांकन सबसे आवश्यक गुण है। उन्होंने कहा कि हर वकील को अपने कार्य के बाद खुद से सवाल करने चाहिए — क्या मैंने केस की तैयारी ठीक से की थी? क्या मैंने बहस सही दिशा में की थी? क्या मेरा तर्क न्याय के अनुरूप था? उन्होंने कहा कि यही सवाल वकील को बेहतर बनाते हैं और यही वास्तविक सीख है।
केस जीतने से ज्यादा जरूरी न्याय दिलाना:
सूर्यकांत ने कहा कि एक वकील का लक्ष्य सिर्फ केस जीतना नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 15 साल की प्रैक्टिस के बाद हर वकील को यह विचार करना चाहिए कि उसके द्वारा लड़े गए केस के फैसले ने आगे आने वाले 100 केसों के समाधान में कितनी मदद की। उन्होंने कहा कि “केस जीतना गौरव की बात है, लेकिन न्याय दिलाना वकील के पेशे की आत्मा है।”
दीक्षांत समारोह में योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति:
इस अवसर पर Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने समारोह की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। समारोह में कई न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ और विश्वविद्यालय के छात्र उपस्थित रहे।
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