Lucknow में 22 मार्च को Jaya Prada की सक्रियता ने एक बार फिर सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी। महज 6 घंटे के भीतर उन्होंने भाजपा के दो प्रमुख चेहरों से मुलाकात की, जिसके बाद उनके दोबारा सक्रिय राजनीति में आने को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लंबे समय बाद उनकी इस तरह की मौजूदगी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात ने बढ़ाई चर्चा:
जया प्रदा ने Pankaj Chaudhary से मुलाकात की और इसकी तस्वीरें भी साझा कीं। बताया जा रहा है कि वह एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लखनऊ आई थीं, जहां कार्यक्रम के बाद उनकी मुलाकात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से हुई। दोनों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई, हालांकि बातचीत के विषय सार्वजनिक नहीं किए गए। पार्टी से जुड़े सूत्र इसे सामान्य मुलाकात बता रहे हैं, लेकिन सियासी जानकार इसे उनके सक्रिय होने के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
लंबे समय बाद दिखीं सक्रियता में:
आखिरी बार मार्च 2024 में Rampur में एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) में पेशी के दौरान जया प्रदा नजर आई थीं। इसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं दिखीं। ऐसे में अचानक उनका लखनऊ आना और बड़े नेताओं से मिलना चर्चा का विषय बन गया है।
सियासी सफर और पहचान:
जया प्रदा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत आंध्रप्रदेश (Andhra Pradesh) से की थी, लेकिन उन्हें पहचान रामपुर से मिली। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के टिकट पर उन्होंने 2004 और 2009 में लोकसभा चुनाव जीतकर संसद तक का सफर तय किया। हालांकि 2010 में उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय लोकमंच (Rashtriya Lok Manch) और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के साथ भी राजनीतिक सफर तय किया और बाद में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) में शामिल हो गईं।
2027 चुनाव को लेकर अटकलें:
सियासी हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि जया प्रदा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में भूमिका निभा सकती हैं। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि उन्हें संगठन में जिम्मेदारी दी जाएगी या चुनावी मैदान में उतारा जाएगा, लेकिन उनकी सक्रियता को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
रामपुर से चुनाव पर संशय:
रामपुर की राजनीति में जया प्रदा का नाम पहले से जुड़ा रहा है, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उनकी स्थिति कमजोर मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रामपुर में उनके लिए दोबारा चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा। जिले की कई सीटों पर पहले से ही मजबूत राजनीतिक समीकरण मौजूद हैं, जिससे उनके लिए चुनौती बढ़ सकती है।
अपर्णा यादव से मुलाकात के मायने:
लखनऊ प्रवास के दौरान जया प्रदा ने Aparna Yadav से भी मुलाकात की। अपर्णा यादव, Mulayam Singh Yadav की छोटी बहू हैं और वर्तमान में राज्य महिला आयोग (State Women Commission) की उपाध्यक्ष हैं। मुलाकात के दौरान अपर्णा यादव ने उनका स्वागत किया और दोनों के बीच आत्मीयता देखने को मिली। सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई।
सियासी रणनीति के संकेत:
राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को महज औपचारिक नहीं मान रहे हैं। माना जा रहा है कि समाजवादी पृष्ठभूमि से जुड़ी दोनों महिला नेताओं को एक साथ आगे लाकर भाजपा नई रणनीति बना सकती है। जया प्रदा और अपर्णा यादव दोनों का सपा से पुराना संबंध रहा है, ऐसे में उनकी सक्रियता को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
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