अमेठी: जायस में भ्रष्टाचार की खुली पोल: हल्की बारिश में ढहा निर्माणाधीन नाला, पीले ईंट और डस्ट के इस्तेमाल का आरोप

Jais (जायस) नगर पालिका क्षेत्र में निर्माणाधीन नाले के पहली ही हल्की बारिश में ढह जाने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। Raebareli-Sultanpur Highway (रायबरेली-सुल्तानपुर राजमार्ग) के किनारे बनाए जा रहे इस नाले के गिरने के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण में मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप लगाए हैं। मामले के सामने आने के बाद नगर पालिका प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। घटना के बाद क्षेत्र में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप:

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि निर्माणाधीन नाले में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि निर्माण कार्य में मजबूत लाल ईंटों के स्थान पर कमजोर पीली ईंटों का उपयोग किया गया। इसके साथ ही सीमेंट के मिश्रण में मौरंग या बालू के बजाय डस्ट का इस्तेमाल किए जाने की भी बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी वजह से हल्की बारिश के बाद ही नाला भरभराकर गिर गया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए।

जांच के लिए पहले लिया गया था नमूना:

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि लगभग एक सप्ताह पहले जांच के नाम पर AE (एई) द्वारा निर्माण स्थल से पांच ईंटों के नमूने लिए गए थे। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नमूना लेने के बाद भी निर्माण की गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी नहीं की गई, जिससे कथित रूप से मानकों के विपरीत कार्य चलता रहा।

एक ही कंपनी को अधिकतर कार्य मिलने का आरोप:

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि Jais Nagar Palika (जायस नगर पालिका) में अधिकांश विकास कार्यों का ठेका एक ही निर्माण कंपनी Mahakal Construction Company (महाकाल कंस्ट्रक्शन कंपनी) को दिए जाने की चर्चा है। आरोप है कि नगर पालिका के लगभग 70 प्रतिशत निर्माण कार्य इसी कंपनी को आवंटित किए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी होती तो ऐसी स्थिति सामने नहीं आती।

प्रशासन ने दिए जांच के आदेश:

मामले के सामने आने के बाद Jais Nagar Palika (जायस नगर पालिका) के EO (अधिशासी अधिकारी) Shailendra Mishra (शैलेंद्र मिश्र) ने पूरे प्रकरण की तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी और यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने की निष्पक्ष जांच की मांग:

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन से कराए जा रहे विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए। लोगों का मानना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोष तय होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की शिकायतें दोबारा सामने न आएं।

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रिपोर्टर: वीरेंद्र सिंह

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