महिला समानता दिवस के अवसर पर देश में महिलाओं की स्थिति पर मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने अलग-अलग दृष्टिकोण सामने रखे हैं। इन रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में महिलाएँ शिक्षा, सुरक्षा बल और वित्तीय क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं, लेकिन समानता की राह अभी लंबी है।
रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिला श्रम भागीदारी दर 2023-24 में बढ़कर 31.7% हो गई है। हालांकि यह वृद्धि उत्साहजनक है, लेकिन G20 देशों के स्तर तक पहुँचने में अभी दशकों लग सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकतर महिलाएँ अब भी असंगठित क्षेत्र में काम करती हैं और केवल लगभग 16% महिलाएँ ही नियमित वेतनभोगी नौकरियों तक पहुँच पाती हैं।
वहीं द गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा को सबसे बड़ी चुनौती बताया है। इसके अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षा और सामाजिक दबाव अब भी महिलाओं को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने से रोकते हैं। कई बार समाधान के नाम पर महिलाओं को अलग-थलग रखने की कोशिश होती है, जो समानता की भावना को कमजोर करती है।
द हिंदू ने संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन के हवाले से लिखा है कि भारत ने नीतियों और बजटिंग के स्तर पर प्रगति की है, लेकिन सामाजिक मान्यताएँ और क्रियान्वयन की कमी अब भी बाधा बनी हुई हैं।
उधर इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि सीआईएसएफ की पहली महिला कमांडो यूनिट की तैनाती और वित्तीय क्षेत्र में सेबी द्वारा महिलाओं को निवेश के लिए प्रोत्साहन जैसी पहलें उम्मीद जगाती हैं।
मीडिया प्लेटफॉर्म्स की इन रिपोर्ट्स से साफ है कि भारत में महिलाएँ नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं, लेकिन वास्तविक समानता के लिए अभी भी ठोस कदमों की आवश्यकता है।
महिला समानता दिवस: प्रगति के बावजूद लंबी है राह

