प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच के संबंधों को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं। कहा तो यह भी जाता है कि ट्रंप और मोदी अच्छे दोस्त हैं लेकिन टैरिफ नीति को लेकर कहीं ना कहीं इस दोस्ती में एक गांठ पड़ती हुई नजर जरूर आई। लेकिन भारत में दोस्ती को मजबूत करने के लिए, ट्रंप की टैरिफ नीति से बचाव के पहले कदम के तौर पर ऑनलाइन विज्ञापनों पर 6% टैक्स न लगाने का फैसला किया है।
जी हां, जो लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का प्रयोग करते हैं और उससे प्राप्त होने वाले विज्ञापन को आय का साधन बनाते हैं, वह इस ऑनलाइन विज्ञापन की परिभाषा को समझ सकते हैं। जिसे आमतौर पर गूगल टैक्स भी बोला जाता है। जैसे कोई यूट्यूबर है और यूट्यूब पर विज्ञापन आता है और इस विज्ञापन से उसकी आय होती है, जैसे कोई वेबसाइट चला रहा है, उस पर ब्लॉग लिख रहा है या न्यूज़ लिख रहा है, उस पर जो विज्ञापन आता है और उस विज्ञापन से जो आय होती है, जिसे आमतौर पर मोनेटाइजेशन भी कहा जाता है। अब गूगल एक चर्चित प्लेटफार्म है और गूगल के द्वारा इन वेबसाइट या यूट्यूब चैनल पर विज्ञापन दिए जाते हैं, अब तक उस विज्ञापन पर भारत की तरफ से 6 फ़ीसदी डिजिटल टैक्स लगाया जाता था। यह समानीकरण शुल्क 2016 में इसलिए लागू किया गया था, ताकि विदेशी कंपनियां भारत में होने वाली कमाई पर यहां उचित कर अदा करें। अब इसे हटाने से गूगल, मेटा और अमेजन जैसी दिग्गज अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों को फायदा होगा। खबर के अनुसार लोकसभा ने मंगलवार को 35 संशोधनों के साथ वित्त विधेयक पारित कर दिया, जिसमें डिजिटल टैक्स हटाने का प्रस्ताव भी शामिल है।
55 प्रतिशत वस्तुओं के आयात पर दी जा सकती है छूट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पारस्परिक टैरिफ लगाने की समयसीमा करीब आने के साथ भारत इसके प्रतिकूल प्रभाव घटाने की कोशिश में जुटा है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका से आयातित 55 फीसदी वस्तुओं पर भारत टैरिफ कटौती कर सकता है। हालांकि, इसके बदले ट्रंप की तरफ से भी कुछ राहत की उम्मीद की जा रही है।
पारस्परिक टैरिफ से करीब 95 हजार करोड़ रुपये “मूल्य के फार्मास्यूटिकल और ऑटोमोटिव निर्यात पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है, जो पूरी तरह अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं। नए टैरिफ इंडोनेशिया, इस्त्राइल और वियतनाम जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं को लाभ पहुंचा सकते हैं।माना जा रहा है कि भारत अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान ऑटोमोबाइल टैरिफ में चरणबद्ध कटौती के लिए दबाव बनाएगा, जो अभी प्रभावी रूप से 100 फीसदी से अधिक है।
इस बीच, रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने यह कहकर उम्मीदें जगा दी हैं कि ट्रंप के टैरिफ युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है। ट्रंप की दो अप्रैल से पारस्परिक टैरिफ लागू करने की घोषणा से उपजी अनिश्चितता के बीच भारत अमेरिका के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है।
भारत का अनुमान है कि ट्रंप के फैसले से मोती, खनिज ईंधन, मशीनरी, बॉयलर और बिजली के उपकरणों जैसी वस्तुओं पर टैरिफ में 6 फीसदी से 10 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।