Video: लखीमपुर खीरी: इलाज न मिलने से आहत युवती की हालत गंभीर, डॉक्टर पर लगाए गंभीर आरोप
रिपोर्टर: हर्ष गुप्ता
लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) जिले से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था और मरीजों के परिजनों के साथ व्यवहार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला अस्पताल ओयल (District Hospital Oyal) में अपने भाई का इलाज करा रही एक युवती मानसिक रूप से आहत हो गई और उसने खतरनाक कदम उठा लिया। गंभीर हालत में युवती को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
भाई के इलाज के दौरान बढ़ा तनाव:
प्राप्त जानकारी के अनुसार युवती का भाई पिछले तीन से चार दिनों से जिला अस्पताल ओयल में भर्ती था। उसके पैर में गंभीर समस्या थी, जिसके चलते डॉक्टरों ने ऑपरेशन की आवश्यकता बताई थी। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन को लेकर लगातार चिंता बनी हुई थी और इलाज में देरी से युवती पहले से ही मानसिक दबाव में थी।
ऑपरेशन के नाम पर रुपये मांगने का आरोप:
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के लिए अस्पताल के एक डॉक्टर ने युवती से 4,000 रुपये की मांग की। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार होने के कारण युवती इस मांग को लेकर असहज हो गई। बताया जा रहा है कि युवती ने डॉक्टर से अपनी मजबूरी बताते हुए बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान डॉक्टर पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया गया।
मानसिक आघात में उठाया खतरनाक कदम:
इस कथित घटना के बाद युवती गहरे मानसिक तनाव में चली गई। परिजनों के अनुसार, वह काफी देर तक परेशान और चुप रही। इसी मानसिक दबाव में युवती ने हानिकारक पदार्थ का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने तत्काल उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार युवती की स्थिति नाजुक बनी हुई है।
अस्पताल प्रशासन में मचा हड़कंप:
घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिला अस्पताल ओयल में इस मामले को लेकर कर्मचारियों और मरीजों के परिजनों के बीच चर्चा तेज हो गई। परिजनों ने संबंधित डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की बात कही है।
प्रशासनिक जांच की बात:
मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी गई है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किस स्तर पर लापरवाही या अनुचित व्यवहार हुआ।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल:
यह घटना सरकारी अस्पतालों में इलाज के दौरान पारदर्शिता, जवाबदेही और मरीजों के परिजनों के साथ संवेदनशील व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिला अस्पताल जैसे प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में यदि इस तरह के आरोप सामने आते हैं, तो आम लोगों का भरोसा व्यवस्था से कमजोर होना स्वाभाविक है। जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में समय रहते सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
परिजनों की मांग और समाज की चिंता:
पीड़िता के परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब और जरूरतमंद परिवार अक्सर सरकारी अस्पतालों पर निर्भर होते हैं, ऐसे में उनके साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह मामला पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
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