UN में सुधार जरूरी, राजनाथ सिंह बोले- कई देश अंतरराष्ट्रीय कानून की उड़ा रहे धज्जियां

लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल (City Montessori School) में विश्व के मुख्य न्यायाधीशों का 26वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। शुक्रवार सुबह इसका शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। शाम के सत्र में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे और वैश्विक परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका और भारत के योगदान पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कई देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी कर रहे हैं और आज की दुनिया में यूनाइटेड नेशंस को समय के साथ बदलने की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना पर चिंता:

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कई देश अपने बनाए कानूनों को पूरी दुनिया पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में UN को मजबूत करना जरूरी है, उसकी आलोचना नहीं। उन्होंने कहा कि UN में सुधार आवश्यक है ताकि यह संस्था विश्व को एक बेहतर दिशा दे सके। उन्होंने कहा कि UN में प्रतिनिधित्व संतुलित होना चाहिए और निर्णय बिना किसी पक्षपात के होने चाहिए।

UN के बदलते स्वरूप की आवश्यकता:

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज दुनिया जटिल राजनीतिक परिस्थितियों, बड़े देशों के प्रभाव और संस्थागत राजनीति की वजह से कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया को एक “नए यूनाइटेड नेशन” की जरूरत है। इसका अर्थ कोई नई संस्था नहीं, बल्कि पुरानी संस्था को नई ऊर्जा, नई कार्यशैली और नए दृष्टिकोण के साथ पुनर्जीवित करना है।

सम्मान और शांति का संबंध:

राजनाथ सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मूल सत्य यह है कि जहां सम्मान होता है, वहीं शांति स्थापित होती है। भारत का इतिहास, संस्कृति और व्यवहार यह साबित करता है कि न्याय और शांति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि न्याय चाहिए तो शांति आवश्यक है और शांति तभी संभव है जब न्याय हो।

विश्व मानवीय संकट में भारत की भूमिका:

उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत हमेशा मानवता के साथ खड़ा रहा है। अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और अफ्रीका में राहत कार्यों से लेकर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बचाव अभियानों तक भारत ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। भारत ने विश्व शांति मिशन में बड़ी संख्या में सैनिक भेजे हैं और कई सैनिकों ने अपनी जान तक कुर्बान की है।

लखनऊ में शिक्षा और संस्कार का संगम:

इस दौरान रक्षामंत्री ने कहा कि लखनऊ में कई संस्थान ऐसे हैं जहां बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार भी दिए जा रहे हैं। उन्होंने सिटी मांटेसरी स्कूल के संस्थापक स्वर्गीय जगदीश गांधी को याद करते हुए कहा कि उनके साथ पुराना भावनात्मक संबंध रहा है और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई।

संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा चुनौतियां:

राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान में दुनिया के कई क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष जारी हैं—इसराइल-हमास युद्ध, यूक्रेन-रूस संघर्ष और अफ्रीका के कई देशों में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे दौर में UN की भूमिका और सक्रिय हो सकती थी, लेकिन संसाधनों की कमी, राजनीतिक जटिलताओं और बड़े देशों के दबाव ने इसकी प्रभावशीलता को कम कर दिया है।

तकनीक और नए खतरे:

उन्होंने कहा कि नई तकनीक ने युद्ध और शांति की अवधारणा बदल दी है। जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा और आर्थिक अस्थिरता नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। दुनिया को मिलकर बातचीत का रास्ता अपनाना होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन:

सुबह के सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया की कई समस्याओं की जड़ आपसी संवाद की कमी है। उन्होंने कहा कि आज की चुनौतियां—जैसे साइबर सुरक्षा, पर्यावरण और वैश्विक आतंकवाद—पर फोकस करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जो आज दूसरों के लिए संकट पैदा करता है, वह कल खुद उसी संकट में फंस सकता है। कोविड-19 इसका बड़ा उदाहरण है।



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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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