हमारे देश में एक वायरस बहुत तेजी से फ़ैल रहा है. कहा जा रहा है कि ये वायरस सीधे दिमाग पर असर करता है और यदि इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति यदि पढ़ा लिखा अंगूठा छाप हो तो भईया काण्ड होना तय है और तो और यदि इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति मदिरा का सेवन कर तो भईया विस्फोट तय है.
फिलहाल इस वायरस का कोई सटीक वैक्सीन नहीं है, जनता की सेवा का दावा करने और सत्ता के सुख को पाने की इच्छा रखने वाले कुछ लोग मनोवैज्ञानिक रूप से इस पर शोध कर रहे हैं.
फिलहाल इसका एक ही इलाज है और वो इलाज पुलिस के पास है, जब वो अपना वैक्सीन लगाती है तो … अब जिसको लगा हो वही समझे..
वैसे इस वायरस का नाम है नफ़रत… जिसका इस्तेमाल इस तरह से किया गया है कि हमारा समाज बीमार , बहुत बीमार होता जा रहा है.
अब इन दो तस्वीरों पर नज़र डालिए. ये दोनों वायरल विडियो उत्तर प्रदेश से सामने आ रहे हैं. इन दोनों विडियो की पुष्टि हम नहीं करते लेकिन पुलिस ने कार्रवाई की है. कितनी की है ये भी बड़ा सवाल है.
एक तस्वीर में एक महानुभाव भारतीय नोटों पर चप्पल पहनकर टहलते नज़र आ रहे हैं, तो दूसरी तस्वीर में कुछ प्राणी, विशेष धर्म को गरियाते नज़र आ रहे हैं.
इन दोनों घटनाएं अलग अलग जगह की हैं, इन घटनाओं में बस एक ही सम्बन्ध है, गिरी हुई मानसिकता का सम्बन्ध.
सबसे पहले बात करते हैं इस वायरल विडियो की. ये वायरल विडियो रामपुर का है. रामपुर के मिलक तहसील मिलक मुर्शीद नगर भैंसोड़ी शरीफ में उर्से लियाकती का आयोजन किया गया था. जिसमें परंपरागत एवं विधिवत रूप से सरकारी चादर दरगाह के मुतावल्ली एवं सज्जादा नशीन हज़रत जावेद हुसैन शाह के निवास स्थान से दरगाह पर प्रस्तुत की जाती है। इसी दौरान कव्वाली का प्रोग्राम भी होता है। इस मौके पर हज़रत सूफी जावेद हुसैन शाह के हजारों अनुयायी एवं श्रद्धालु इस प्रोग्राम में हिस्सा लेते हैं। उनके अनुयायी एवं श्रद्धालु उनको एक समूह में घेर लेते हैं, और पीरो मुर्शीद के इश्क में झूमने लगते हैं । और उन पर नोटों की बरसात जारी कर देते हैं। और इसी बीच सज्जादा नशीन जावेद हुसैन शाह भारतीय नोटों को रौंदना शुरू कर देते हैं.
देश के महापुरुषों के चित्र, अशोक की लाट व अन्य देश के सम्मानित प्रतीक चिन्हों के भारतीय नोटों पर चप्पल पहनकर रौंदने का ये विडियो वायरल हो जाता है. इस विडियो में देखा जा सकता है कैसे ये शख्स नोटों की तरफ देख भी रहा, नोटों अपने हाथों से हवा में उड़ा भी रहा और उसे रौंद भी रहा है.
लेकिन बड़ा सवाल है की कार्रवाई क्या हुई? क्या ऐसी कार्रवाई हुई जो समाज के लिए सबक बने?
जनता भी खूब है, अन्धविश्वास का ये आलम है कि न देश के सम्मान की परवाह है और न ही अपने भविष्य की.
खैर अब बात इस दूसरे विडियो की. इस वायरल विडियो में देश के कुल चार सम्मानित नागरिक नज़र आ रहे हैं जो एक विशेष धर्म को अपमानित करते हुए नज़र आ रहे हैं. दरअसल विडियो देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ये तो पहले से नफरती वायरस पीड़ित हैं और मदिरा का तड़का लग गया है. नतीज़ा वायरल विडियो के माध्यम से सामने आ गया. खैर हम इसकी पुष्टि तो नहीं करते लेकिन कहीं सुना था कि मादिरा के रंग में रंगीन होने के बाद दिल की सच्चाई जुबां पर आ जाती है.
अब इस विडियो के वॉल्यूम को हमने बंद कर रखा है , क्योंकि वो सुनाने लायक नहीं है क्योंकि हम सभी धर्मों और वर्णों का सम्मान करते हैं.
खैर गाज़ीपुर पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया. बताया जा रहा कि पुलिस ने गिरफ्तार करने के अपने कर्तव्यों का पालन भी किया है. लेकिन गिरफ्तार केवल क्यों हुआ? बाकि कहाँ हैं? और इस विडियो में जो दूसरे नम्बर का है, असली जहर तो वही उगल रहा है, वो कहाँ है? खैर ये जाँच का विषय है और उम्मीद है की पुलिस आरोपियों को सलाखों के पीछे जरुर पहुचायेगी.
अब सोशल मीडिया पर भी नफरती वायरस से ग्रसित लोग हैं और इन सबकी तुलना बांग्लादेश और पकिस्तान से करने लगेंगें. तो दादा पहले ही सुन लीजिये. अपराध का कोई धर्म नहीं होता, इस खबर से कुछ तो समझ आ ही गया होगा. जो ना आया हो तो जरा इसका जवाब भी खोज लीजिये कि, एक अपराधी किस्म का व्यक्ति घटनाये किसी के साथ कर सकता है लेकिन ज्यादातर देशों में अल्पसंख्यकों पर आत्याचार का आरोप क्यों लगता है? ये तो पता ही होगा कि बांग्लादेश में कौन अल्पसंख्यक है और भारत में कौन कौन?
धर्म आधारित अपराध करने वालों का एक ही धर्म होता है, जिसे नफरत कहते हैं. ऊँच नीच की भावना से पहले से ग्रसित थे, अब इन्हें नफरती कीड़े ने भी काट लिया. खैर इलाज कानून से ही होगा. जवाब मिल जाए तो कमेंट बॉक्स में लिख देना. उम्मीद है कि सभी देश का सम्मान करते हैं और हमारा देश मोहब्बत और एकता से चलता है. देश की एकता और अखंडता के साथ खिलवाड़ न करें.
जय हिन्द
………..
