गाजीपुर (Ghazipur) जनपद में चार छात्रनेताओं पर दर्ज रंगदारी के मुकदमे ने राजनीतिक और सामाजिक माहौल को गरमा दिया है। मामला अब केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे कथित अवैध होटल संचालन और पुराने विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच पूरे शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। छात्रनेताओं और उनके समर्थकों का दावा है कि यह कार्रवाई एक सुनियोजित प्रतिशोध का हिस्सा है।
मुकदमे में नामजद छात्रनेता:
गाजीपुर (Ghazipur) कोतवाली में दर्ज एफआईआर में शशांक उपाध्याय (Shashank Upadhyay), दीपक उपाध्याय (Deepak Upadhyay), अभिषेक राय (Abhishek Rai) और संदीप राय (Sandeep Rai) के खिलाफ 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप लगाया गया है। पुलिस द्वारा दर्ज इस मामले के बाद जिले में हलचल बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर, आरोपित छात्रनेताओं के समर्थकों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
पुराने विवाद से जुड़ता मामला:
छात्रनेताओं के पक्ष में दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2023 में गाजीपुर (Ghazipur) के दो होटलों में एक नाबालिग से जुड़ी घटना सामने आई थी, जिसने पूरे जिले को झकझोर दिया था। उस समय इन्हीं छात्रनेताओं ने सड़क से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक विरोध दर्ज कराया था। जांच के दौरान उन होटलों में कथित रूप से अवैध गतिविधियों की पुष्टि भी होने की बात सामने आई थी, जिसके बाद यह विवाद और गहराता गया।
प्रतिनिधिमंडल की जिलाधिकारी से मुलाकात:
इस मामले को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी (District Magistrate) अनुपम शुक्ला (Anupam Shukla) से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जिन लोगों की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है, उनका खुद का आपराधिक रिकॉर्ड भी जांच का विषय है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि संबंधित होटल बिना लाइसेंस, बिना पार्किंग और बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं।
अवैध गतिविधियों के आरोप और विरोध:
छात्रनेताओं का कहना है कि उन्होंने केवल अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन अब उसी का परिणाम उनके खिलाफ मुकदमों के रूप में सामने आ रहा है। उनका सवाल है कि क्या जागरूक नागरिक होना अपराध है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि यदि फर्जी मुकदमों को वापस नहीं लिया गया तो बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
प्रशासनिक स्तर पर जांच का आश्वासन:
जिलाधिकारी (District Magistrate) अनुपम शुक्ला (Anupam Shukla) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आधार पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। फिलहाल प्रशासन सभी पक्षों के दावों की जांच कर रहा है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
जनता की नजर प्रशासन के फैसले पर:
गाजीपुर (Ghazipur) में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर छात्रनेताओं पर लगे आरोप हैं तो दूसरी ओर अवैध गतिविधियों और पुराने विवादों की बात सामने आ रही है। ऐसे में पूरा मामला अब प्रशासनिक जांच पर टिक गया है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और सच्चाई किस रूप में सामने आती है।
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