गाजीपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने स्कूली वाहनों के खिलाफ सख्त जांच अभियान चलाया है। ‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ के तहत चलाए जा रहे इस अभियान में नियमों और निर्धारित सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान 12 स्कूली वाहनों को सीज किया गया, जबकि 40 वाहनों का चालान कर करीब छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
यह कार्रवाई परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक गाजीपुर के निर्देश पर की जा रही है। एआरटीओ धनवीर यादव और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम लगातार स्कूली वाहनों की जांच कर रही है। जांच के दौरान वाहनों के निर्धारित मानकों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कार्रवाई:
अभियान के दौरान जिन स्कूली वाहनों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं मिला, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई। जांच में 12 वाहनों को सीज किया गया, जबकि 40 अन्य वाहनों का चालान किया गया। इन वाहनों पर करीब छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
परिवहन विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य केवल नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों पर जुर्माना लगाना नहीं है। विभाग का जोर इस बात पर है कि स्कूली बच्चों का आवागमन सुरक्षित तरीके से हो और उनके सफर के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए।
बच्चों के सफर को सुरक्षित बनाने पर जोर:
अभियान के तहत स्कूली वाहनों के संचालन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग के अनुसार, बच्चों को स्कूल आने-जाने में एक घंटे से अधिक समय नहीं लगना चाहिए। इसके लिए भी जरूरी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

इसके साथ ही स्कूली वाहन चालकों का सत्यापन कराना जरूरी है। वाहनों का निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना भी अनिवार्य है। स्कूलों को उत्तर प्रदेश इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मॉनिटरिंग पोर्टल पर आवश्यक जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
64 वाहनों की बनी थी रेड लिस्ट:
एआरटीओ के अनुसार, निर्धारित मानकों में सुधार नहीं करने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ पहले भी नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद मानकों में सुधार नहीं करने वाले 64 वाहनों की रेड लिस्ट तैयार की गई थी।
इनमें से अभी भी 36 वाहन निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर सके। इसके बाद इन 36 वाहनों को निलंबित कर दिया गया है। परिवहन विभाग की ओर से स्कूली वाहनों की जांच के दौरान नियमों के पालन को प्राथमिकता दी जा रही है।
अभियान का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा:
परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के संयुक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विभाग की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
स्कूल जाने वाला प्रत्येक बच्चा परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में बच्चों को स्कूल ले जाने और वापस घर पहुंचाने वाले वाहनों का सुरक्षित होना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्कूली वाहनों की जांच और नियमों के पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आगे भी जारी रहेगा जांच अभियान:
गाजीपुर में स्कूली वाहनों के खिलाफ शुरू किया गया यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम वाहनों की जांच के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि स्कूली बच्चों का सफर सुरक्षित रहे।
विभाग की कार्रवाई के तहत मानकों का पालन नहीं करने वाले वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि स्कूली बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा मिले और उनके आवागमन में सुरक्षा नियमों की अनदेखी न हो।
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रिपोर्ट : सऊद अंसारी
ब्यूरो: हसीन अंसारी
