Video: शिक्षकों की सेवा पर संकट! गाजीपुर में प्रदर्शन, पीएम और सीएम को भेजा गया ज्ञापन

रिपोर्ट: जफर इकबाल



Ghazipur: उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर गाजीपुर में बड़ा आंदोलन देखने को मिला। जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ गाजीपुर, जितेन्द्र कुमार यादव के नेतृत्व में शिक्षकों ने कचहरी स्थित शिक्षक भवन से मार्च निकाला और जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से 01 सितम्बर 2025 को उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए उस फैसले पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई, जिसमें कक्षा आठ तक पढ़ाने वाले सभी सेवारत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य कर दिया गया है। इस निर्णय से लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और आजीविका खतरे में पड़ गई है।


टीईटी अनिवार्यता से पुरानी नियुक्तियाँ भी प्रभावित

संगठन का कहना है कि आरटीई अधिनियम 2009 और एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के अनुसार शिक्षकों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया था। इसमें 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक पूरी तरह योग्य माने गए थे और उन्हें टीईटी से छूट प्रदान की गई थी। वहीं, 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए निश्चित समय सीमा में टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक था।
अब न्यायालय के इस नए निर्णय ने इन दोनों श्रेणियों को एक ही दायरे में ला दिया है। इससे वे शिक्षक भी प्रभावित होंगे जिन्हें पूर्व में वैध रूप से नियुक्त किया गया था और जिनकी सेवाओं को पहले सुरक्षित माना जाता था।


अनुभवी शिक्षकों के साथ अन्याय” – जिलाध्यक्ष

जिलाध्यक्ष जितेन्द्र कुमार यादव ने कहा कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को संभाल रहे अनुभवी शिक्षकों पर अचानक टीईटी की अनिवार्यता थोपना न केवल अनुचित है बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर डालेगा। उनका कहना था कि सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और इस नियम को केवल भविष्य की नियुक्तियों पर लागू करना चाहिए ताकि मौजूदा शिक्षकों की सेवाएँ सुरक्षित रह सकें।


20 लाख से अधिक शिक्षक होंगे प्रभावित

जिलामंत्री इसरार अहमद सिद्दीकी ने भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस फैसले से देशभर में 20 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित होंगे। उन्होंने बताया कि वैधानिक प्रक्रिया से नियुक्त किए गए शिक्षकों की सेवाएँ अब असुरक्षित हो जाएँगी। यह स्थिति न केवल शिक्षकों के मनोबल को गिराएगी बल्कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और प्रभावशीलता पर भी बुरा असर डालेगी।


संगठन की मांग और ज्ञापन की मुख्य बातें

प्राथमिक शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री से स्पष्ट आग्रह किया है कि न्यायालय का यह निर्णय केवल भविष्य में होने वाली नियुक्तियों पर ही लागू हो। साथ ही, 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक नीतिगत या विधायी कदम उठाए जाएँ। संघ का कहना है कि यदि इस मुद्दे पर समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ तो लाखों शिक्षकों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा और शिक्षा तंत्र में गंभीर अव्यवस्था फैल सकती है।


बड़ी संख्या में शिक्षकों की भागीदारी

ज्ञापन कार्यक्रम में हजारों की संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। इसमें वरिष्ठ उपाध्यक्ष आनन्द प्रकाश यादव, कोषाध्यक्ष पवन गुप्ता, महातिम यादव, कमलेश यादव, धनन्जय यादव, दीपक जायसवाल, भगवती तिवारी, अरुण राय, वीरेन्द्र यादव, शिवमूरत कुश्वाहा, राजेश सिंह, नीलम, सुनील यादव और चन्द्रशेखर सिंह जैसे प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाना अनिवार्य है, क्योंकि यह सिर्फ व्यक्तिगत हित नहीं बल्कि पूरे शिक्षा जगत का प्रश्न है।

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