Video:गाजीपुर: शहीद दिवस पर पंच तत्व में विलीन हुए शहीद कैप्टन प्रशांत चौरसिया

Ghazipur के जमानियां (Zamania) कस्बे में शहीद कैप्टन Prashant Chaurasia को शहीद दिवस पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। देहरादून में प्रशिक्षण के दौरान साथी जवान की जान बचाते हुए बलिदान देने वाले कैप्टन का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके घर पहुंचा, वहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर ओर शोक का माहौल था और “कैप्टन प्रशांत चौरसिया अमर रहें” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

घर पहुंचते ही मचा कोहराम:
सोमवार दोपहर करीब 3:30 बजे जब शहीद का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा, तो परिवार का दुख असहनीय हो गया। मां सुमन देवी बेटे को देखकर बिलख पड़ीं, वहीं पिता पुरुषोत्तम चौरसिया की आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे थे। आसपास मौजूद लोगों की आंखें भी नम थीं और हर कोई इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने पहुंचा था।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई:
शहीद का पार्थिव शरीर बलुवा घाट (Baluwa Ghat) ले जाया गया, जहां सेना के जवानों ने उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। इस दौरान पूरे घाट पर भारत माता के जयकारे गूंज उठे। छोटे भाई मयंक चौरसिया ने अपने शहीद भाई को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और सभी ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

हेलीकॉप्टर से वाराणसी, फिर सड़क मार्ग से जमानियां:
कैप्टन प्रशांत का पार्थिव शरीर सेना के हेलीकॉप्टर से देहरादून (Dehradun) से Varanasi लाया गया। इसके बाद सड़क मार्ग से जमानियां पहुंचाया गया। दोपहर 1:33 बजे तहसील के रामलीला मैदान (Ramlila Maidan) में पार्थिव शरीर रखा गया, जहां सैकड़ों लोगों ने तिरंगा हाथ में लेकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहां से जुलूस के रूप में पार्थिव शरीर को घर ले जाया गया।

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि:
इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। उपजिलाधिकारी (SDM) ज्योति चौरसिया ने शहीद की मां से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। साथ ही अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक भी मौजूद रहे।

कैसे हुआ हादसा:
20 मार्च 2026 को देहरादून में सेना की भैरव बटालियन (Bhairav Battalion) की घातक प्लाटून प्रतियोगिता के दौरान यह हादसा हुआ। नदी पार करने के दौरान एक साथी जवान को बचाने के प्रयास में कैप्टन प्रशांत खुद नदी में गिर गए। पानी के भीतर पत्थर से टकराने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 22 मार्च को उन्होंने अंतिम सांस ली।

परिवार और जीवन परिचय:
कैप्टन प्रशांत अपने माता-पिता की तीन संतानों में मंझले थे। बचपन से ही उनके भीतर देश सेवा का जज्बा था, जिसे उन्होंने अपनी मेहनत से साकार किया। उनकी बड़ी बहन सलोनी का हाल ही में विवाह हुआ था, जबकि छोटे भाई मयंक चौरसिया परिवार के कारोबार में सहयोग करते हैं। बेटे के बलिदान की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।


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रिपोर्टर: जफ़र इकबाल

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