Video: यूपी में पाकिस्तानी जासूसी रैकेट का सनसनीखेज खुलासा!

गाजियाबाद में एक सनसनीखेज मामले में सीमा पार पाकिस्तान को लाइव फुटेज भेजने वाले सीसीटीवी (CCTV) जासूसी रैकेट का खुलासा हुआ। इस मामले ने देश की आंतरिक सुरक्षा और चीनी निर्मित कैमरों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया कि इंटरनेट से जुड़े ये कैमरे अनजाने में घरों और दफ्तरों की जासूसी का माध्यम बन रहे थे।

मुख्य आरोपियों का विवरण:
जांच में गाजियाबाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक 18 से 22 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। प्रमुख आरोपी और उनकी भूमिका इस प्रकार है:

मुख्य मास्टरमाइंड और सहायक:

सुहैल मलिक (23): मेरठ/बिजनौर निवासी, पूरी योजना का सूत्रधार और पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क में। प्रत्येक महत्वपूर्ण फुटेज के बदले लगभग 10,000 रुपये मिलते थे।

साने इरम उर्फ महक (25): गाजियाबाद निवासी, सुहैल के साथ काम कर रही थी। व्हाट्सएप के माध्यम से पेमेंट और नेटवर्क संचालन में सक्रिय।


भर्ती और नेटवर्क संचालक:

सरदार (उर्फ जोरा सिंह): ब्रिटेन नंबर से युवाओं को भर्ती करता था।

समीर और नौशाद अली: बिहार निवासी, मुख्य ऑपरेटर्स। नौशाद अली को हाल ही में फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया।


जमीन पर कार्यरत ‘फुट सोल्जर्स’:

गणेश गिरी (20) – नेपाल

विवेक राय (18) – पूर्णिया, बिहार

गगन प्रजापति (22) – मेरठ

दुर्गेश निषाद (26) – जौनपुर

राज, शिवा, रितिक – उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से


महिलाओं और नाबालिगों का इस्तेमाल:

6 नाबालिग (15-17 वर्ष) – रेलवे स्टेशनों और सैन्य मार्गों पर कैमरे लगाने में मदद।

मीरा (28) – मथुरा निवासी, सीधे ‘सरदार’ के निर्देश पर काम कर रही।


गिरोह का काम करने का तरीका (Modus Operandi):

भर्ती – सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को शामिल किया।

पेमेंट – छोटे कामों के लिए 500 से 5,000 रुपये, लाइव फीड के लिए 10,000 रुपये। भुगतान UPI के माध्यम से।

ट्रेनिंग – विदेशी हैंडलर्स द्वारा ऑनलाइन सोलर-पावर्ड कैमरों को ऊंचाई पर छिपाकर लगाने की प्रशिक्षण।


ताजा स्थिति:
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह का लक्ष्य दिल्ली से कश्मीर तक करीब 50 संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाकर सेना की आवाजाही पर नजर रखना था। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया और कदम:
केंद्र सरकार ने देशव्यापी सीसीटीवी ऑडिट का निर्णय लिया है। 1 अप्रैल से केवल ‘हैकिंग प्रूफ’ कैमरों की बिक्री पर कड़ा नियम लागू होगा। यह कदम देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और ऐसे जासूसी रैकेट पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है।




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