रिपोर्टर: सऊद अंसारी
गाजीपुर। शहर में 21 दिसंबर को टाउनहॉल (Town Hall) के मैदान से ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स के अवसर पर निकलने वाला पारंपरिक चादर और कव्वाली का जुलूस इस बार भी पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाएगा। टाउनहॉल मैदान से शुरू होकर जुलूस प्रकाश टॉकीज (Prakash Talkies), सुहासिनी (Suhasini), रजदेपुर (Rajdepur) और कोतवाली (Kotwali) मार्ग से गुजरते हुए बड़े इमामबाड़े तक पहुंचेगा। इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और इसे शहर का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम माना जाता है।
पारंपरिक मार्ग पर आगे बढ़ेगा जुलूस:
उर्स के मौके पर निकलने वाला यह जुलूस हर वर्ष की तरह अपने निर्धारित मार्ग से निकलेगा। टाउनहॉल मैदान से प्रारंभ होकर जुलूस प्रकाश टॉकीज होते हुए सुहासिनी और रजदेपुर की ओर बढ़ेगा। इसके बाद कोतवाली मार्ग से गुजरकर बड़े इमामबाड़े तक धार्मिक रस्मों के साथ पहुंचता है। यह मार्ग वर्षों से तय है और स्थानीय समुदाय की आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है।
चादरपोशी और कव्वाली का मुख्य आयोजन:
उर्स के इस कार्यक्रम की सबसे विशेष बात पारंपरिक चादरपोशी और कव्वाली का आयोजन है। बड़ी संख्या में लोग चादर लेकर शामिल होते हैं और ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। जुलूस में कव्वाली की प्रस्तुतियाँ माहौल को आध्यात्मिक और सुकून देने वाला बनाती हैं। कलाकारों और समुदाय की सहभागिता इस आयोजन को और भी आकर्षक बना देती है।
भाईचारे और एकता का संदेश:
इस उर्स जुलूस को केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी माना जाता है। कार्यक्रम में लोग आपस में मिलजुल कर शामिल होते हैं और शहर में सौहार्द का संदेश देते हैं। जुलूस के दौरान आपसी सहयोग और भाईचारे का वातावरण देखने को मिलता है, जो इस कार्यक्रम की खास पहचान है।
अजमेर शरीफ भेजी जाती है चादर:
जुलूस के बाद एकत्रित की गई राशि से चादर तैयार की जाती है, जिसे अजमेर शरीफ दरगाह भेजा जाता है। वहां ख्वाजा गरीब नवाज की बारगाह में यह चादर चढ़ाई जाती है। चादर चढ़ाने का उद्देश्य सभी लोगों और पूरे मुल्क की सलामती और हिफाजत की दुआ करना होता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और लोगों की गहरी आस्था से जुड़ी हुई है।
पुलिस और प्रशासन की विशेष व्यवस्था:
उर्स जुलूस के दौरान भीड़ को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की जाती है। सुरक्षा, मार्ग नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन के लिए तैनात टीमें पूरी सतर्कता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।
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